बातें मेरी
सितंबर 13, 2020
बातें मेरी
कुछ शब्दों में
पूरी नहीं होती
एक नज़र
देख के
ऑ॑खें नहीं भरती
कुछ और कहने के लिए
अघीर हो जाता हूॅ॑
इसलिए ..
तेरे पास आ जाता हूॅ॑
कई शब्द
मेरे अंतर्मन में पड़े
अवसाद बन सडे़ है
तुम्हें सुना के
हल्के हो जाना चाहता हूॅ॑
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