चापलूसी -कविता हिन्दी flattery and mean thoughts in hindi

चापलूसी -कविता हिन्दी flattery and mean thoughts in hindi 

चापलूसी करना - मालिक के प्रति वफादारी प्रस्तुत करना है । तब तक जब तक मालिक ख़ुश न हो जाए । दुम हिलाते रहना । जिसके कहने पर किसी को भी काट खाना । 
चापलूसी वो क्रिया है जिसमें आदमी अपने फायदे के अनुसार अपना अस्तित्व भी मिटा देता है । प्रस्तुत है इस पर कविता हिन्दी में 👇👇 

flattery and mean thoughts in hindi

(१)
मालिक जब खुश हो गए तो
रोटी फेंक दें
और चापलूस अपना दुम हिला दें
कितना सुन्दर तालमेल है 
मतलब निकल गया तो
मालिक को छोड़ दें 

पहचान 

(२)
चापलूसों की एक ही पहचान
नहीं रहते हैं कभी जिसकी पहचान
उम्मीद ना रखो उससे कभी यारों
रंग बदलने में माहिर है गिरगिट ही जान !!
(३)
स्वयं के अस्तित्व को मिटा दें
मौका मिला और मतलब निकाल लें
जिसकी तारीफ करने की आदत
अपना कम मालिक के सामने दुम हिला दें !!
(४)
न सच से जिसे वास्ता
मिल जाए सुबह और शाम जिसे नास्ता
पेट भरने से जिसे काम
सिर्फ मतलब है जिसका वास्ता  !!
(५)
हां में हां कह देना 
ना में ना नहीं कह पाना
स्वार्थ बहुत बड़ा है !!!

(६)
उसकी ज्यादा तारीफ बताती है
उसे कोई मतलब साधना है !!!
(७)
गिरा आदमी अच्छा है
सब समझते हैं अच्छा है
उसे मतलब से मतलब
दुनिया से क्या वो अच्छा है
मालिक है वफादारी जरूरी
सच से कुछ नहीं दुम हिलाना अच्छा है
वो गिरकर भी मुस्कुरा लेता है
गिरना उसके लिए अच्छा है !!

किसी की खुशामदी में
दुश्मनों की बुराई करना
सच से कोई वास्ता नहीं
ईमान की बुराई करना
भाता है उसकी मालिक को
ऐसे चमचागिरी करना !!! 

गलती को
सही बताया
इस तरह
मालिक के सामने
दुम हिलाया !!!!

चापलूसी 

खुश करने का प्रयास 
अपनापन देने का अहसास 
मालिक की गलतियों को 
तारीफ़ कर 
सही बताकर रहना पास !!!!

---राजकपूर राजपूत''राज''
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