सियासत और जनता: एक कवितामय नज़रिया Politics and the People: A Poetic Perspective

सियासत और जनता: एक कवितामय नज़रिया Politics and the People: A Poetic Perspective
आज की दुनिया में राजनीति और सियासत का प्रभाव हर किसी पर पड़ता है। कई बार हम देखते हैं कि जो लोग सामान्य जीवन में उदासीन या निष्क्रिय रहते हैं, वे अचानक राजनीतिक घटनाओं या आंदोलनों से प्रेरित होकर सक्रिय हो जाते हैं। यह सिर्फ भावनाओं का असर नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नेतृत्व की शक्ति का प्रमाण है।
मुख्य विचार:
सियासत में जनता हमेशा किसी न किसी लक्ष्य का केंद्र होती है। नेताओं के फैसले और नीतियाँ सीधे लोगों के जीवन पर असर डालती हैं। कभी-कभी जनता नेता बन जाती है, और अवसर के अनुसार निर्णय लेने लगती है।

सियासत और जनता: एक कवितामय नज़रिया 


जो आदमी अभी तक
गहरी उदासीनतओं में
डूबी हुई थी
अचानक 
सियासत की बातों से
आंदोलित हो गया
जैसे उसे कुछ मिल गया हो
और चले गए पीछे पीछे
अपने हुक्मरानों के 
इतने दर्शन के फायदे हैं 
सियासत में !!!

सियासत में 
जनता टारगेट होते हैं 
भले ही 
बहुत के आधार पर 
अलग-अलग होते हैं 
निशाना तो 
अकेले लोगों की की जाती है 
और सुनी जाती है 
भीड़ की पीड़ा  !!!

सियासत आगे रखने पर 
जनता भी 
नेता बन जाते हैं अवसर अवसर की बात है 
नेता भी बेवकूफ बन जाते हैं !!!!

अभी मत सोच 
कौन नेता हैं 
परिणाम आने दें 
जनता भी नेता हैं !!!!

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