रिश्तों और भावनाओं पर कविता
कभी-कभी जीवन में बहुत कुछ दिखता है, समझ आता है, लेकिन उसे शब्दों में कहना आसान नहीं होता। “मत पूछ” एक ऐसी ही कविता है, जो दिल के दर्द, रिश्तों की सच्चाई, समाज की चालाकियों और पुरुष के छुपे हुए भावनात्मक संघर्ष को उजागर करती है। यह कविता उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है, जो अक्सर भीतर ही दबकर रह जाते हैं। जो समझते तो सब-कुछ है लेकिन किसी को बताया नहीं जा सकता है । पढ़िए इसी पर हिंदी कविता 👇
मत पूछ: भावनाओं, रिश्तों और समाज की सच्चाई | पुरुष की भावनाएँ कविता
Man's Feelings Poem
देखती है ऑ॑खें बहुत कुछ
मगर दिल की बात मत पूछ
उसकी बातों में दम नहीं है
जानता हूॅ॑ लेकिन मत पूछ
जहरीली हवा है चारों ओर
जीना या मरना है मत पूछ
वो नशें में हैं दावे पे यकीन नहीं
सादे में कहेंगे वो बात मत पूछ
देखें नहीं पलट के मुझे यकीन था
अब प्यार है कितना मत पूछ
मौका ढूंढ रहा है आघात करेगा
मीठा है कब करेगा मत पूछ
मूॅ॑छ मोड़ते रह गए थे लंकापति
जला के चलें गए कौन मत पूछ
अब चालाकियाॅ॑ सबमें है राज़
शह और मात कितनी है मत पूछ !!!!
पुरूष कह नहीं पाता है
इसलिए रो नहीं पाता है
जितनी आसानी से
एक औरत कह पाती है
रो पाती है, खुलकर
पुरूष का हंसना मना है
रोना मना है
खुलकर
वो महसूस कर पाता है
अपनों की खुशियां
जब मेहनत करके आता है
यही जीवन भाता है !!!!
जिस रोग से पीड़ित हो
मरहम वहीं लगाएंगे
ज्ञान की बातें कई हैं मगर
अपनी स्थिति अनुसार अपनाएंगे
तुम जानते हो मुझे और दुनिया को
जो गीत भाएंगे
वहीं गाएंगे !!!!
तुम्हें समझ जाना था
मेरी भावनाओं को
मेरे कहने से पहले
प्यार की कमी है,शायद
तुझमें मेरे लिए !!!!
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---राजकपूर राजपूत''राज''

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