हिन्दू पर्व पर नकारात्मक बातें होना आम है । धार्मिक क्रियाकलापों, अनुष्ठान, विचार, जीवन शैली पर नफरती आलोचना का शिकार सबसे ज्यादा हिन्दू ही है । आलोचना को कबीर के दृष्टिकोण से मत समझना, वर्तमान के ज्ञानी के हेय भावना भरने के लिए करते हैं । हिन्दुओं की तीज व्रत आदि रीति रिवाजों के समय तो ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग की भरमार होती है । जो सोशल मीडिया पर सवाल, ज्ञान व राय देते हैं । पढ़िए इसी आलोचनात्मक दृष्टिकोण को हमारी छवि को ख़राब कर रही है ।
रक्षा बंधन और नकारात्मक बातें
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
तुम सोच बैठते हो
उन नफरती और नकारात्मक
लोगों की बातों को
विचार करते हो
उन ऊलजुलूल बातों पे
जो तुम्हें हताश करने के लिए
लिखे गए हैं
जैसे तुम्हें कहते होंगे
रक्षाबंधन के लिए
कोई शुभ मुहूर्त की जरूरत नहीं है
हर दिन भाई बहन का प्यार है
जो लाजमी सा महसूस होता है
लेकिन आप भूल गए
ऐसा इंसान केवल तुम्हें
परंपराओं से दूर करना चाहते हैं
ताकि तुम्हारी संस्कृति
मर जाए धीरे धीरे
और तुम बन जाओ
उनके जैसे
जन्मदिन और सालगिरह जैसी संस्कृति
नया साल मनाओ धूमधाम से
जागो रात के बारह बजे तक
पीओ शराब दोस्तों से मिलकर
मस्ती के नाम पर
जो तुम्हें अच्छा लगेगा
नयापन के नाम पर !!!
रिश्तों की अहमियत
आज भी है
सिर्फ तुम एकतरफा
चलाना चाहते हो
अपने मतलब पे
जटिल बना रहे हो
अपने दृष्टिकोण से !!
भाई बहन का रिश्ता
एक दूजे का हिस्सा
पिता सा ख्याल भाई का
मां सा ख्याल बहन का
अनोखा दुलार, अपनापन
वात्सल्य और सम्मान
भाई बहन का प्यार
अनोखे रिश्तों का संसार !!!
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