प्रतीक्षा में खड़े हैं सच - कविता wait-in-stand-is-true-poetry-literature-lifeआजकल सच को मानने वालों की संख्या कम हो गई हैं । सच को स्वीकार तो सब करते हैं । जरूरी समझते हैं लेकिन झूठ को अपने पास रखते हैं । दोहरे मापदंड से झूठ ने सच को छला है । चालाकी और टेढ़े मेढे रास्ते पर चल कर सबको उलझा दिया है । ऐसा नहीं कि सच महसूस नहीं होता है । सबको होता है । लाभ-हानि के हिसाब से सच में तकलीफ़ होती है । झूठ सुविधानुसार चलने की ताकत देता है । इसलिए इसके विरुद्ध में कोई नहीं है । सच और झूठ पर पढ़िए बेहतरीन कविता 👇
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प्रतीक्षा में खड़े हैं सच
यह बताने के लिए
झूठ के सहारे रहोगे
वास्तविक सुख से दूर रहोगे
लेकिन कोई सुन नहीं रहा है
उल्टा उसे चिढ़ाने के लिए
झूठ के साथ हो गए
यह कहकर कि सुविधा है
इसके साथ
तत्काल तत्क्षण
लेकिन सच कह रहा है
स्थाई नहीं
निरंतरता नहीं
कौन सा जीवन स्थाई है
जिंदगी एक दो दिन के लिए आई है
कौन नहीं जानता है
और सच चुप हो गया
उसके तर्क में खो गया
लज्जित और निर्बल !!!
सच हारता नहीं
झूठ जैसे दोगला नहीं
ऐसे सामंजस्य स्थापित किया
सच को झूठ
और झूठ को सच किया
सच हार गया
इसी खुबसूरती में !!!!
झूठ कितना ताकतवर है
जिसके समर्थन में
सफेदपोशों में
कितने मान्यवर है
प्रतीक्षा में खड़े हैं सच
अकेले में
झूठ कितना हमलावर है
चारों ओर से शोर है
हल्ला इस तरह से मचाया है
जिसे देख न्याय भी लजाया है
कई तर्क और तुलानात्मक आरोप से
सच को छकाया है
अब प्रतीक्षा में खड़े हैं सच
एक-एक पांव संभल कर रखते हुए
सिर्फ अस्तित्व बच जाए
यही सोचते हुए
झूठ की ताकत के सामने !!!!
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