तुलनात्मक राजनीतिक और न्याय - लेख comparative-political-and-justice-articles-meregeet-literature-life

तुलनात्मक राजनीतिक और न्याय - लेख comparative-political-and-justice-articles-meregeet-literature-life तुलना करना लगभग उसके समान गुणों, रूप, चरित्र, आदि चीजों की समकक्षता को नापी जाती है । जिसके आधार पर बराबरी का दर्जा दिया जाता है । जो कि ठीक है । महानता का एक स्तर का हिस्सा है । जिससे किसी बात को समझने में आसानी होती है । तुलना अक्सर हम जिसे देख चुके हैं, उसी के साथ की जाती है । जिससे हम आज परिचित हो रहे हैं । इससे अनजान चीजों व्यक्तियों आदि को समझने में आसानी लगती है । 

तुलनात्मक राजनीतिक और न्याय - लेख

लेकिन ठहरिए, यहीं तुलना यदि राजनीति, या तथाकथित बुद्धिजीवी द्वारा किया जाता है है तो, किसी खास चरित्र को सही करने का तरीके हो सकते हैं । जो तुलना करके उसे बचाने का प्रयास होता है । ध्यान भटकाने, बहलाने फुसलाने का तरीका जो किसी बिरादरी के अपराध को छोटा कर देता है । 

तुलनात्मक न्याय की बातें केवल गुमराह करने के लिए है । जहां अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए दूसरों की गलतियों को उजागर करते हैं । ताकि ध्यान को भटकाया जा सके । दूसरी ओर ।

ताकि लोगों की सोच उस ओर हो जाए जिस ओर तुलनात्मक चर्चा हो रही है । वर्तमान मुद्दे से भटकाकर पूर्व में घटित घटनाओं पर ध्यान आ जाए । ऐसा करना कोई न्याय की बात नहीं है लेकिन सियासत बुद्धि इसका प्रयोग बड़ी होशियारी से करते हैं । ताकि न्याय की मांग करने वाले थक जाय । हताश, निराश हो जाय । 
जहां - जहां ऐसी चर्चा होती है । वहां न्याय की कोई उम्मीद नहीं होती है । पक्ष और विपक्ष दोनों दोषी प्रतीत होता है । दोनों पक्ष खुद को श्रेष्ठ साबित करके खुश होते हैं लेकिन जनसामान्य ठगा सा महसूस करते हैं । निराशा ऐसी छाती है जो पक्ष और विपक्ष के कारण उदासीनताओं में घिरी हुई रहती है ,,सदा । 

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