व्यस्तता पर कविता busy-on-poetry-life.

 व्यस्तता में खोता गया busy-on-poetry-life.


आदमी परेशान था
बस रोता गया
जिंदगी के भागमभाग में
भटकता गया

वो देख नहीं पाए
सूरज की रौशनी
चांद की चांदनी
पेड़ों का हरापन
पर्वत की ऊंचाई
खुद से खुद ही
बातें करता गया
व्यस्तता में खोता गया

अब भी घिरते हैं बादल
चिड़ियों के कलरव करते हैं घायल
कल- कल करते झरने
नदियां आगे बहते- बहते
जीवन के गीत नई गाती है
आंखों को जो सुहाती है
मगर जिसके सामने से
आदमी यूं ही गुजर गया
व्यस्तता में खोता गया

आज भी वही हरियाली है
सूरज में वहीं लाली है
प्रकृति के हर रंग सही है
जहां तुम्हारा ध्यान नहीं है
कुछ वक्त निकालो अपने लिए
बेहतर जीवन को समेटने के लिए
तभी बेहतर अहसास होगा
जिससे जीवन खास होगा
अब सोच तू क्यों छोड़ता गया
आदमी व्यस्तता में खोता गया !!!

फोन की स्क्रीन चलते ही नाम समझ गया 

सुबह-सुबह काम के समय 
बड़बड़ाते हुए 
दूसरे कामों में व्यस्त हो गया 
काल रिसीव नहीं किया 

वहीं दवाईयां और पैसे 
मानसिक क्रमबध्दता को असंतुलन कर गया 
बूढ़ी मां का फोन 
देखकर काल रख देना और रिसीव कर लेना 
निश्चित दिनचर्या में 
सहजता महसूस किया 
इस तरह व्यस्त हुआ 
धीरे-धीरे बुढ़ी मां 
बेटे की व्यस्तता से खुश थी 
फोन न उठा पाना 
बेटे की समृद्धता है !!!!

कभी-कभी किसी का फोन न उठाना 
यह जताने के लिए काफी है 
कि आदमी व्यस्त है 
हालांकि प्राथमिकता के आधार पर 
काल रिसीव नहीं करते हैं !!!!

busy-on-poetry-life.



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