सियासत और विद्वता – हिंदी कविता politics-on-poetry-hindi

🌸सियासत और विद्वता – हिंदी कविता politics-on-poetry-hindi 🌸

सियासत और समाज में कभी-कभी लोग शब्दों और दिखावे के जाल में दूसरों को प्रभावित करते हैं।

कविता यह बताती है कि कैसे बोलने की आज़ादी, विद्वता और सियासी चालबाजी का उपयोग लोगों की समझ और निर्णयों पर असर डालता है।

यह संदेश देती है कि सोचना और अपने मूल्य बनाए रखना कितना आवश्यक है।

✨ कविता: सियासत और विद्वता ✨

आप कुछ पल हँस सकते हैं,

कुछ पल खुश हो सकते हैं,

क्योंकि आपने हरा दिया है किसी को—

बातों से,

अघातों से,

शब्दों को तोड़कर,

नग्नता का प्रदर्शन कर दिखा दिया है अपनी विद्वता,

लेकिन स्वीकार नहीं की अपनी गलतियों को।

जिसमें तुम माहिर हो, नित्य प्रतिदिन।

लेकिन खुद को साबित कर दिया तुमने,

जमाने को डरा दिया तुमने,

सियासत अपना कर! ⚡


बोलने की आज़ादी यदि आदत में शामिल है,

वह व्यक्ति चर्चा में शामिल है।

सियासत में बोलने वाले नेता बनते हैं,

सुनने वाले जनता।

जितना सुनने वाले मुग्ध होंगे,

नेताओं की गलती दिखाई नहीं देती है।

इतने बोल दिए जाते हैं,

विचार शब्दों को सच मान लेते हैं,

और जो मान लेते हैं,

सोचना बंद कर देते हैं।

उसकी निश्चिंतता,

पिछलग्गूपन हो जाता है!


आदमी हार जाता है,

अपने ही विचार से,

जीवन के आधार से,

भूल जाता है जीवन का सार।

फैलाते हैं ऐसा भ्रम सियासत में,

लोग सोचने लगते हैं सियासतदानों जैसे।


दर्शन के सबसे सरल रूपों में,

राजनीतिक विचार है—

न जंगल में तपस्या करके पाना है,

न गुफाओं में रहना है।

बस सुविधाओं के हिसाब से ढल जाना है! 🌿

🌟 और अंत में कविता 🌟

यह कविता यह संदेश देती है कि सियासत और विद्वता का दिखावा केवल भ्रम पैदा करता है।

शब्दों और चालबाजी से समाज में गलत धारणाएं बन जाती हैं, और लोग सोचना बंद कर देते हैं।

सच्ची विद्वता और समझ यही है कि हम स्वतंत्र रूप से सोचें, अपने मूल्यों को न खोएं, और किसी के दिखावे या भाषण से भ्रमित न हों।

जीवन का सार और समाज की सही दिशा केवल जागरूकता और सोच के माध्यम से प्राप्त हो सकती है।

-राजकपूर राजपूत "राज "

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