समझ की कीमत, हमारे जीवन में article at the cost of understanding

 समझ का निर्माण अनुभव के द्वारा होता है ।article at the cost of understanding जितनी समझ होगी,, अनंत गहराई की अनुभूति होगी । सुकून भी हो सकता है । दुःख भी हो सकता है । ये समझ पर निर्भर करता है । कितने सकारात्मक व नकारात्मक सोच का प्रभाव है । जिससे समझ विकसित हुई है । 

article at the cost of understanding 

एक बार समझ का निर्माण हो जाने पर अक्सर लोग उसी दृष्टिकोण से आंकते हैं । झांकते हैं । जहाॅ तक समझ है । एक नजरिया तत्काल आंकलन कर उसके प्रति सोच, निर्णय,का निर्माण कर लेते हैं । अक्सर ऐसी स्थिति में हमारी-आपकी समझ, नफ़रत या प्रेम के आधार पर बंट जाते हैं । किसी की सोच में खड़े हो जाते हैं । जिसकी संवेदनाएं हमें निष्पक्ष होने नहीं देते हैं । विचारों की लड़ाई यही से शुरू हो जाती है । दो धड़ों में । 

समझ - एक महीन रेखा है । जिस पर चलने के लिए सतत् जागरुकता की आवश्यकता होती है । ज़रा सी समझ के बाहय हुए और खुद को दिशाहीन कर जाते हैं । जितनी गहराई से समझ कर निर्णय लिया जाता है, उसका जीवन उतना ही सुगमतापूर्वक चलता है । समझ विकसित होने पर ही व्यक्ति बेहतर निर्णय लेते हैं । जिसकी जितनी समझ है उतनी ही आगे का रास्ता साफ होता है । 

बहुत कम ही लोग होंगे जो खुद को निष्पक्ष रख सके । खासकर आजकल के जमाने में । जहां हर लोगों की समझ स्वयं के हितों के प्रति सजग है । जहां हितों का टकराव दिखाई देते हैं । वहीं आपके विरोध दिखाई देते हैं । कोई नेक इरादे नहीं । अच्छे बुरे से मतलब नहीं हैं । विरोध के हर बोल में स्वयं का लाभ है । जबकि समझ आपकी उलझनों को सुलझाते हैं । क्योंकि ये बुद्धि से विकसित होते हैं । जितने व्यापक समझ होगी उतनी ही जल्दी निर्णय की क्षमता होगी । 

निर्णय की क्षमता कशमकश को तत्काल समाप्त कर देते हैं । क्योंकि हमारी समझ किसी समस्या के आगे पीछे का करण,,कारक,हल को अपने दृष्टिकोण में आसानी से स्वीकार कर लेते हैं । 

इसलिए कहा जा सकता है कि हमारी समझ ही हमारे जीवन को सुगम,, सुखमय बनाते हैं । इसे बढ़ाते रहिए !!!!!

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