फासला इतना न था गजल Ghazal on love
फासला इतना न था
कि दुरियॉं ख़त्म नहीं होती
बस कुछ लफ्ज़ ही कहें थे तुम्हें
क्या शिकायत मोहब्बत नहीं होती
तेरी नाराजगी बताती है दिल की बात
अब कभी तुमसे मुलाकात नहीं होती
कुछ बातें सिर्फ दिखावटी होती है
क्या रिश्तों में इतनी समझ नहीं होती !!!
फासला कविता
उसे मोहब्बत भी नहीं थी
नफ़रत भी नहीं थी
इस तरह रिश्तों से बचते थे
दिल में किसी की अहमियत भी नहीं थी !!!
फासला इतना न रख
पास हो कर दुरियां दिखाई दे
शहरों का अनजानापन
कामों की व्यस्तता दिखाई दे
तुम चाहो तो निहार सकते हो अपने आसपास को
प्रेम हो तो जिंदगी की खुशबू दिखाई दे
इन्हें भी पढ़ें 👉 इंसान की फितरत
0 टिप्पणियाँ