ज्ञान की पूर्णता | जानकारी और वास्तविक ज्ञान पर चिंतनशील हिंदी कविता jaankari aur vastavik gyan kavita
आज सूचना (Information) प्राप्त करना आसान हो गया है। कुछ पुस्तकें पढ़कर, कुछ लेख सुनकर या कुछ विचार याद कर लेने से व्यक्ति स्वयं को ज्ञानी समझने लगता है। किंतु वास्तविक ज्ञान केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन में उतरी हुई समझ, अनुभव और विवेक है। प्रस्तुत कविता ज्ञान और जानकारी के अंतर को रेखांकित करती है तथा बताती है कि सच्चा ज्ञान वही है जो व्यवहार में दिखाई दे।जानकारी और ज्ञान एक नहीं हैं। जानकारी मस्तिष्क को भर सकती है, लेकिन ज्ञान जीवन को दिशा देता है। वास्तविक ज्ञान वही है जो व्यक्ति को विनम्र, विवेकशील और संतुलित बनाए तथा उसके आचरण में दिखाई दे। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇
ज्ञान की पूर्णता कविता
केवल कुछ शब्दों में
केवल कुछ पुस्तकों में
ज्ञान की पूर्णता नहीं मिलती है
केवल जानकारी है
जिसपर इतराने का हक़ नहीं
जबकि ज्ञान की पूर्णता
स्थित प्रज्ञा है
जो हर मूर्त और अमूर्त की अनुभूति हैं
जो यह परख लेता है कि
किसी वस्तु के गुण-दोष क्या है !!!!!!
कथन और आचरण कविता
कहने बोलने में अंतर है
ज्ञान अपनाने का मंतर है
तुम केवल बताते हो
क्या कभी खुद अपनाते हो
नव बुद्धिस्ट की तरह आलोचना करना
नफ़रत इतना जताते हो
ये असंतोष व्यक्त करना तुम्हारा
किसी को कमजोर करना तुम्हारा
ज्ञान तुम्हारा कमतर है
कहने बोलने में अंतर है !!!!
इसलिए ज्ञान का मूल्य
शब्दों में नहीं,
व्यवहार में है।
कथन में नहीं,
आचरण में है।
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2 टिप्पणियाँ
बिल्कुल सही
जवाब देंहटाएंधन्यवाद 🙏
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