ठहरो तो पास मेरे | प्रेम और प्रतीक्षा पर भावपूर्ण हिंदी कविता

ठहरो तो पास मेरे | प्रेम और प्रतीक्षा पर भावपूर्ण हिंदी कविता thahro to paas mere hindi-kavita

प्रेम केवल साथ चलने का नाम नहीं, बल्कि उन क्षणों का भी नाम है जो स्मृतियों में जीवनभर महकते रहते हैं। कभी-कभी कुछ पल का ठहराव वर्षों की दूरी पर भी भारी पड़ जाता है। यह कविता उसी ठहराव की आकांक्षा है । सच्चा प्रेम समय नहीं माँगता, केवल थोड़ी-सी उपस्थिति माँगता है। कई बार कुछ पल का साथ, पूरी उम्र की याद बन जाता है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇 

ठहरो तो पास मेरे


थोड़ा-सा ठहरो तो पास मेरे,
ये लम्हा बस जाए मेरे अहसास में।

इतनी-सी चाहत तो कर सकता हूँ—
ज़िंदगी जीऊँ,
और हर साँस में
तेरा ही नाम आए।

गुज़र जाता है दिन
यूँ ही तेरे बिन,
मगर तेरे बिना
वक़्त कभी मेरे पास नहीं ठहरता।

तुम हो
तो हर पल में रौनक है,
हर धड़कन में उजाला है।
तुम न हो
तो ज़िंदगी चलती तो है,
पर उदासी का मौसम साथ चलता है।

ठहरो तो पास मेरे,
कुछ बातें अभी अधूरी हैं।
कुछ ख़ामोशियाँ
अब भी तुम्हें पुकारती हैं।

शायद मैं
कुछ भूल रहा हूँ,
या शायद
अपने ही दिल को समझ नहीं पा रहा।

बस इतना कर दो—
कुछ पल और ठहर जाओ,
ताकि मैं
अपनी धड़कनों को
तुम्हारी मौजूदगी का अर्थ
फिर से समझा सकूँ।

कौन जाने
फिर ऐसी मुलाक़ात हो या न हो,
इसलिए आज
इस पल को
यादों की किताब में
हमेशा के लिए लिख जाने दो।

ठहरो तो पास मेरे,

क्योंकि कुछ प्रेम
कहे नहीं जाते—
सिर्फ़ महसूस किए जाते हैं।

ठहरो तो पास मेरे 
ये दिल क्यों है उदास मेरे 
कुछ मैं भूल रहा हूं शायद 
ठहरो तो पास मेरे 
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-राजकपूर राजपूत 



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