जिंदगी की प्लेट में कविता हिन्दी Ghazal Jindagi ki Plet

जिंदगी कई तरह से जीते हैं । कुछ लोग केवल एक ही रंग में रंग जाते हैं । कुछ विविध रंगों से खुद को रंगीन रखते हैं । आत्मसंतुष्टि के लिए जरूरी है कि एक नजरिया खुद के लिए स्थापित हो । वैसे भी आजकल स्वयं को शिक्षित मानने वालों की फौज खड़ी है । क्या वो सचमुच सही जीवन जी रहे हैं । या फिर केवल भटकना है । जीवन भर । 

 जिंदगी की प्लेट में

तरह तरह के व्यंजन है सेट में

तलाश अपनी जारी रखो

कुछ नहीं मिलेगा वर्ना लेट में

खरीदोगे तो रिश्ते भी मिल जाएंगे

बीच बाजार में कई रेट में

पोथी पत्रा नहीं किसी के पास

पढ़ना है सर्च मारो अब नेट में !!!

जिंदगी की बातें 

जिंदगी की प्लेट में

थोड़ी सी लेट में

कुछ नहीं मिलेगी

जिंदगी की प्लेट में !!!!


जीने वाले जीते हैं 

कई तरह से 

तुने बिगाड़ दी जिंदगी अपनी 

दर्द को जीवन मानकर 

कोई जीते हैं भला 

इस तरह से 

निरंतर दर्द को सहन करके 

खुद को महान बताने लगे 

खुद को बड़ा बाकी को छोटा बताने लगे

खुदगर्जी है ऐसा जीना भी 

कायरता और बोझिल भी 

फालतू में दुनिया को समझाने लगे !!!!


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