🌸 भूख और जीवन – हिंदी शायरी bhukh-aur-jeevan-shayari 🌸
भूख केवल पेट की तृप्ति नहीं है। यह जीवन की असमानता, अवसरों की कमी और सामाजिक अन्याय का प्रतीक है।
यह शायरी हमें याद दिलाती है कि असली परिवर्तन और सहायता केवल भावनाओं और अभिनय से नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और अवसर देकर आता है।
✨ शायरी: भूख और जीवन ✨
चंद लफ़्ज़ों की डायरी में,
लिखा हूँ जिंदगी तेरे लिए। ✍️
कभी आना तुम,
पत्ते पलट कर पढ़ लेना,
तेरी बहुत मेहरबानी होगी मुझ पर। 💌
भूख एक अवसर है—
किसी को वोट मिलेगा,
किसी को टीआरपी। 📺
भूखा व्यक्ति तड़पेगा,
समझने वाले समझेंगे,
किसी के अभिनय में झलकेगा,
प्रसिद्धि मिलेगी,
मगर भूखा व्यक्ति को भूख ही लगेगी। 🍞
चाहे जली हुई रोटी हो,
स्वादिष्ट ही लगेगी।
भूखा व्यक्ति को सांत्वना न दो,
सहानुभूति न दो,
रोटी न दो,
भाषण न दो। ❌
भूख का अभिनय मत करो।
तुम्हें पैसा मिलेगा,
प्रसिद्धि मिलेगी,
उसे रोज़गार दो,
ताकि स्थायित्व और भूख मिटे।
भूखा व्यक्ति की भूख मिट जाती है,
मगर मतलबी, पैसों के लिए जीने वालों का पेट नहीं भरता।
नदी, पहाड़, पेड़-पौधों तक,
डकार जाने के बाद भी,
वे तलाशते रहते हैं। 🌿
🌟 और अंत में कविता 🌟
यह शायरी यह संदेश देती है कि सच्ची सहायता और बदलाव केवल दिखावे से नहीं आता, बल्कि स्थायी रोजगार, अवसर और सामाजिक न्याय देकर ही संभव है।
भूख केवल पेट की आवश्यकता नहीं, यह जीवन की असमानताओं और स्थायित्व की आवश्यकता का प्रतीक है।
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