प्रेम, भरोसा और समर्पण | विश्वास और रिश्तों पर भावपूर्ण हिंदी कविता prem bharosa aur samarpan kavita

प्रेम, भरोसा और समर्पण कविता prem bharosa aur samarpan kavita


प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और समर्पण का भाव है। जब किसी का साथ हमें भीतर से आश्वस्त करता है, तब प्रेम जीवन की शक्ति बन जाता है। लेकिन हर संबंध प्रेम पर आधारित नहीं होता; कुछ लोग सहारा खोजते हैं, तो कुछ अवसर। यही अंतर रिश्तों की दिशा तय करता है। प्रस्तुत कविता प्रेम, भरोसे और समर्पण के इसी सत्य को व्यक्त करती है।
सच्चा प्रेम सुरक्षा, भरोसे और समर्पण से बनता है। अवसरवादिता रिश्तों को कमजोर करती है, जबकि स्थिरता उन्हें मजबूत बनाती है। प्रेम तभी टिकता है जब उसमें सूरज जैसी निरंतरता और विश्वास जैसी गहराई हो। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇 


तुम्हारा साथ कविता 

तुम रहो पास तो सुरक्षित घेरा लगता है
तुम रहो दूर तो ये दिल बेचारा लगता है

तुम साथ चलो मेरे सफ़र में हरदम तो
हर ग़म में भी मौसम सुहाना लगता है

बेशक छूट जाए अब ये दुनियादारी 'राज'
मेरे दिल के दर्द को तेरा सहारा लगता है !!!!

अलसाया जीवन कविता 


अलसाया हुआ जीवन ढूंढता है प्रेम 
इसलिए भटक जाता है 

घर से भागी हुई लड़की 
सहारा ढूंढता है 

समर्पित हो जाती है 
अपने प्रेम पर 

और अवसर ढूंढने वाले लड़के 
गुलामी देखते हैं 

ढूंढने और देखने में बहुत अंतर है 

ढूंढने वाले समर्पित हो जाती है 

किसी एक पर 

अवसर देखने वाले 
तलाश लेते हैं 
कई दिशाएं 

इसलिए प्रेम ठगा जाता है 

अवसरवादी लोगों से !!!!

दिशाएं कविता 


सभी दिशाओं से नहीं बढ़ता है ,सूरज 
चांद आज भी आधा, पूरा हो जाता है 

जिसकी रौशनी की उम्मीद नहीं करते हैं, लोग 
जैसे सूरज पर भरोसा है 
नित्य, स्थाई 

जब तक तुम नहीं रहोगे ऐसे 
फिर भरोसा कैसे प्रेम का, 
सूरज जैसे !!!!
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prem bharosa aur samarpan kavita



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