सच और सियासत – हिंदी कविता Truth and Politics – Hindi Poem


सच और सियासत – हिंदी कविता Truth and Politics – Hindi Poem

कभी-कभी रिश्तों और समाज में सच और भरोसा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि दिलों में छुपी चालाकी और सियासत से तय होता है।
यह कविता उस जटिल स्थिति को दर्शाती है, जहाँ अविश्वास और मनमर्जी का खेल सच्चाई को चुनौती देता है।

✨ कविता: सच और सियासत ✨

सच का फैसला कौन करेगा,
जब हम दोनों के दिल में सियासत है? 
तुम डर रहे हो मुझसे,
मैं डर रहा हूँ तुझसे। 💔
अंदेशा, अविश्वास है एक-दूसरे से,
सच स्वीकारेगा कौन यहाँ से?
जो देखा गया जमाने में,
व्यस्त हैं सभी मतलब निकालने में।
तुम थके, मैं भी थका,
न्याय रह गया है अब बातों में।
हर पल डर का आघात है। 
सच का फैसला कौन करेगा,
जब हम दोनों के दिल में सियासत है? 
मनमर्जी सोच को स्थापित किया,
जो न माने उसे इग्नोर किया। 
संतों जैसा ज्ञान तुम्हारा,
सबको सोशल मीडिया पर फारवर्ड किया। 
न रखा कुछ भी, न अपनाया कुछ भी,
जीने के तरीके मतलब है, न बचा कुछ भी।
न कभी लिखा गया कोई धर्म में,
न दिखा कभी कुछ कर्म में।
ऐसे उदाहरण बनकर आ गए,
पैसा ही सबकुछ है और तुम छा गए। 
व्यापार की बस बिसात है,
सच का फैसला कौन करेगा,
जब हम दोनों के दिल में सियासत है? ⚖️

🌟 और अंत में कविता 🌟


यह कविता यह संदेश देती है कि दिलों में छुपी सियासत और अविश्वास सच्चाई के फैसले को प्रभावित करता है।
सच्चाई, न्याय और प्रेम की रक्षा केवल ईमानदारी, समझ और स्पष्ट संवाद से ही संभव है।
हमें अपने भीतर की सच्चाई को पहचानकर, मनमर्जी और चालबाजी से दूर रहना चाहिए। 💖

-राजकपूर राजपूत राज 
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Truth and Politics – Hindi Poem




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