खुद में गुरु हो जाना | आत्मबोध, विवेक और सफल जीवन पर प्रेरणादायक हिंदी कविता /aatmabodh-aur-safal-jeevan-kavita
मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी यात्रा स्वयं को समझने की यात्रा है। बाहरी ज्ञान, उपदेश और विचार तभी सार्थक होते हैं जब व्यक्ति अपने भीतर विवेक, आत्मचिंतन और संतुलन विकसित करे। जो स्वयं का मार्गदर्शक बन जाता है, वह भीड़ के भ्रम, प्रलोभनों और भटकाव से बचकर अपना रास्ता बना लेता है। यह कविता आत्मबोध, विवेक और आत्मनिर्भर सोच का संदेश देती है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇
आत्मबोध पर कविता
खुद में गुरु हो जाना
सफल जीवन का शुरू हो जाना
संतुष्टि तभी मिलेगी तुम्हें
खुद का ही खुद गुरु हो जाना
न भटकावे कोई
न बहकावे कोई
आदमी को आदमी का पहचान हो जाना
खुद में गुरु हो जाना
सफल जीवन का शुरू हो जाना
मिल रही है सियासत ऐसी
अच्छी बातों की ऐसी तैसी
समझना यहां, सबकी चाल जानना
खुद में गुरु हो जाना
सफल जीवन का शुरू हो जाना
स्थापित कर लो दुनिया की नजर
मुश्किल नहीं है चलने में ये डगर
सम्भलते- सम्भलते बढ़ते जाना
खुद में गुरु हो जाना
सफल जीवन का शुरू हो जाना !!!
सकारात्मक सोच कविता
समझना प्यार से
अपनेपन से
मुझे लगे ना
कि तुम बुद्धिस्ट हो
जो आलोचना करोगे
तथाकथित बुद्धिस्टों की तरह
नफरतों से
खुद को श्रेष्ठ साबित करोगे
समझना अपनों की तरह
अकेले में
मैं सुनने के लिए तैयार हूॅं
न समझाना मुझे
नव स्वघोषित वैज्ञानिकों की तरह
सोशल मीडिया पर
ज्ञान झाड़ते हुए
स्वयं की जिंदगी में
कोई चरित्र नहीं
किसी से कोई संबंध नहीं
रिश्ते नाते केवल क्षणिक
आज तेरा तो कल उसका
ऐसा ज्ञान बाटना नहीं !!!!
बदलो खुद को
दुनिया का तुम हिस्से हो
बनाओं खुद को
जिसके तुम किस्से हो
न छेड़ उन चीजों को
जो दूसरों के हैं
गलत दृष्टि से !!!!!
और अंत में कविता
सच्चा गुरु बाहर नहीं, भीतर बैठा विवेक है। जब व्यक्ति स्वयं को समझने, सुधारने और सही दिशा में चलने लगता है, तब उसका जीवन अधिक संतुलित, सार्थक और सफल बनता है। आत्मबोध ही जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है।
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