मेरा प्रेम यही कहीं है । जिसे मेरी नजरें हमेशा तलाश करती है । मुझे यकीन है एक दिन मिल जाएगी । जिसका अहसास मुझे हर पल होता है । प्यार उसी से, उम्मीद उसी से, फिर भी वह समझ नहीं पाता है । कभी-कभी सोचता हूं, ये प्यार क्यों हो जाता है
पढ़िए कविता हिन्दी 👇👇
ये कौन आया बादलों की ओट से
ये कौन आया बादलों की ओट से
बदन छु लिया मानों अपने होंठ से
पुलकित,,हर्षित हो गया अतस मेरा
वो हृदय ले गया अपने पास मेरा
प्रतिदिन ऑ॑खों से ऑ॑सू की धार बहे
पीड़ा अंतर्मन की अब हम किससे कहें
गरजो बरसों रे काली-काली बदरिया
मेरी ॲ॑खियों की प्यास बुझे ओ मेरे पिया
हवा के संग -संग तेरी यादें आई है
तुम नहीं आएं इसी बात की रुसवाई है
मैं ढूंढता हूं तुझे हर जगह मेरे यार
तुझ बिन सुना - सुना है मेरा संसार !!!
मुझे मिल न पाया
वो प्यार जिसकी आशा थी
वो मुझे समझ न पाया
जिसकी मुझे चाहत थी
उसके बेरूखी ने सितम ढाए
फिर भी ये दिल उसे ही चाहे
इंतजार इतना भी ठीक नहीं है
मेरी रात यूं ही गुजर जाय
और दिन ढल जाए
मेरे दर्दे दिल को समझ न पाया
वो मुझे मिल न पाया !!!
पढ़िए इस पर बेहतरीन कविता हिन्दी में न जाने कहां हो तुम
---राजकपूर राजपूत
1 टिप्पणियाँ
Bahut hi sundar
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