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बहुत हो गई दिल्लगी कुछ नाराजगी भी हो
वक्त को देख जमाने बदल गए
मेरे दर्द को यदि तुमने छूवा होता My Pain Poem in Hindi
प्रेम और सियासत – दिल की बातों की कविता prem-siyasat-rishton-ka-safar
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