बेचैन मन में शांति नहीं और अशांत मन अवसादों से घिर जाता है । बार-बार उस विचार पर जा कर टिक जाता है । जिसे हमारा मन अच्छा मानता है । भीतर ही भीतर कई तर्क चलता है । किसी को समझाने के लिए नहीं बल्ले किन खुद को ही समझाने के लिए । अशांत मन कल्पना करता है कि बाहर शांति है । ऐसा इसलिए क्योंकि उसके भीतर शांति नहीं है । बेचैन मन अपनी व्याकुलता को महसूस करते हैं । जिसे अपने सिवा बाहर महसूस करता है ।
विचारों का आना जाना मन में
जब मैं परेशान हो जाता हूं
खुद से
उलझा रहता हूं
खुद के भीतर
तब दुनिया मुझे
बहुत खुबसूरत लगती है
उसके पास जिंदगी लगती है
जिसकी मुझे प्यास लगती है
सिवाय मेरे
मैं सबसे बेकार लगता हूं
जब मैं उदास रहता हूं
दुनिया में निश्चितता दिखाई देती है
जिसे मैं छूता हूं
सुकून के अहसास हर जगह है
ऐसा लगता है
सिवाय मेरे
अंतर्द्वंद्व में ठहरा रहता हूं
खुद के भीतर
मिलता नहीं सुकून
जबकि बाहरी दुनिया में
दिखता है
सुकून !!!!
मन का विचार/कविता
बैचैन मन
सिर्फ तुम्हारी तलाश करता है
जब तक न मिल जाओ
सोचता रहता है
बेचैन होकर
इसलिए तुम रहो पास
जब तक
मेरी प्यास
न मिट जाए !!!
तर्क ये नहीं है
कि तुम अपने विभत्स विचारों को छुपा कर
किसी की आलोचना करों
ऐसा करके तुम
खुद को दुनिया के
सबसे पाखंडी आदमी सिद्ध करते हो !!!!
जैसे-जैसे
विचार में गहराई आती है
लोगों और अपनी बुराई दिखाई देती है
सम्हल जाना
सावधान रहना
शामिल होना उचित नहीं है
तुम्हारे अकेले होना उचित है !!!!
मन कभी खाली नहीं होता है
जिसे चाहता है उसके लिए रोता है
कोई इसे कैसे समझाएं
खुद का मन
खुद का नहीं होता है !!!!

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