किसी के नज़रों में सम्मान पाना
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उसके जैसा बन जाना है,
उसकी बौद्धिक और भावनात्मक दृष्टि को पाना है।
दूसरों में खुद को देख सकूं,
ऐसा अपनापन जगाना है।
पर जब कहीं ऐसा हो जाए,
तुम्हारी राह उसकी राह से अलग हो जाए,
तब अजनबी बन जाना पड़ता है…
क्योंकि उसके जैसा बन पाना आसान कहाँ है।
लोग अहम में जीते हैं,
उनसे कभी टकरा मत जाना,
वरना वही लोग तुम्हें
अपना दुश्मन समझ बैठेंगे।
इस दुनिया में स्वीकार उसी का होता है,
जो हर बात पर “हाँ” में “हाँ” मिलाता है।
कभी सच बोलने की कोशिश मत करना,
वरना अपने ही दोस्तों को
तुम्हें पहचानना मुश्किल हो जाएगा…
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आखिर मैं कहकर क्या पाऊंगा
बात खाली रहेंगी मैं हार जाऊंगा
जो बिन मांगे मिल जाते हैं
उसे मैं कैसे सम्हाल पाऊंगा !!!
मैं हारूंगा
जो तुम्हें समझा रहा हूं
जीत मेरी तब होती
बिन कहें समझ जाते
मेरी भावनाओं को !!!!
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