प्रकृति का अनदेखा संसार – इंसान और उसके विस्मृत साथी- गजल painful-ghazal-hindi
प्रकृति हमारे जीवन का अनमोल हिस्सा है – सूरज, चांद, सितारे, नदियाँ, पर्वत, पेड़-पौधे, पक्षी और तितलियाँ। लेकिन इंसान अपने व्यस्त जीवन में इन अद्भुत रचनाओं को देखना, महसूस करना और सराहना करना भूल जाता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि प्रकृति और उसके जीव-जंतुओं के साथ हमारा संबंध कितनी सुंदरता और जीवन की गहराई लेकर आता है।
कविता - वहीं दिन वहीं रातें
वहीं दिन है वहीं रातें
वही दिन है वही रातें
वही पल है वही बातें
क्यों भींगना छोड़ दिया है
वही मौसम है वही बरसातें
कुछ भी तो नहीं बदले हैं
वही रिश्ते हैं वही नाते
तुझमें उदासी क्यों छाई है
वही दिल है वही जज्बातें
आज भी इंतजार में खड़ा हूॅं
वही दरिया है वही तुम आते !!!
कविता - धरती और जीव-जंतु
सूरज ठीक समय पर निकला,
चांद भी चलते गए,
सितारे भी हंसते गए।
पेड़ों ने निर्दयता देखी,
नदियों ने अपनी धार मोड़ी,
पहाड़ खुद को झुकते हुए देखा।
पक्षियों ने अपने घर का आंगन छोड़ दिया,
तितलियों ने फूलों पर मंडराना छोड़ दिया।
बस नहीं छोड़े तो जीवन,
जो भी आज हैं, वहीं हैं।
लेकिन इंसान ने
इन्हें देखना छोड़ दिया,
अपने साथ!!!
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---राजकपूर राजपूत

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