खुशी क्या है - कविता happy-poem-in-hindi

खुशी क्या है - कविता happy-poem-in-hindi

हम अक्सर खुशी को पैसों, सफलता या दूसरों पर श्रेष्ठ साबित होने से जोड़ते हैं। लेकिन सच्ची खुशी कहीं और छुपी होती है—हमारे भीतर। यह कविता इसी विचार को व्यक्त करती है कि असली संतोष और आंतरिक शांति किसी बाहरी साधन से नहीं, बल्कि स्वयं की पूर्णता और मन की शांति से मिलती है।

कविता सच्ची खुशी

खुशी क्या है?

चंद पैसे—

जिसे दिखाया जा सकता है लोगों को

या जलाया जा सकता है दिलों को,

जिसके पास नहीं है

या रहे सकता है इस अभिमान में कि

मेरे पास पैसा है।

या फिर,

खुद को श्रेष्ठ सिद्ध करना,

स्वयं के मापदंडों में,

यही कि मैं बेहतर हूँ

उन लोगों से

जो ईमानदारी से बंधे हुए हैं,

किसी जड़ता में

मुझसे बदतर,

सामान्य जिंदगी जीते हैं।

जबकि…

उच्छृंखलता को हक़ मानकर,

नैतिकता को ताक में रखकर,

खुद पर ऐंठना,

किसी पर तंज कसना,

मानो अपनी खुशी जाहिर करना है।

इस तरह खुद को

बेहतर साबित करना

अपने से भिन्न लोगों के बीच।

खुशी क्या चीज़ है?

किसी भी हद में जाकर

सफलता की प्राप्ति,

भले ही समाज को ताक में रखकर,

अपनी भलाई चाहना,

गिरकर ही सही,

मगर सफलता की मलाई चाटना।

सारी दुनिया तो ऐसी है—

खुद को संतुष्ट कर देना।

क्या सचमुच यही खुशी है?

या फिर ढूंढ नहीं पाई है सच्ची खुशी

खुद के दिलों में?

दिमाग से उलझकर,

या भूल गए हैं मन की शांति को,

जो किसी बाह्य संसाधन से नहीं मिलती,

खुद की अहम की पूर्ति से नहीं मिलती।

सच्ची खुशी वह अहसास है,

जहां स्वयं की पूर्णता का भास हो,

जहां सारे शिकवे, शिकायत,

घृणा या नफ़रत न हों।

बेशक जिसे दिखाया न जा सके,

समझाया न जा सके,

लेकिन स्वयं में समेटे

भीतर ही भीतर खास हो।

जिसके पास ऐसा अहसास हो,

वहीं सच्ची खुशी है,

जिसे किसी के द्वारा प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

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