विचार और आचरण | शब्दों से अधिक कर्म की महत्ता पर कविता on poetry status
मनुष्य का मूल्य केवल उसके विचारों, भाषणों या दावों से नहीं आँका जा सकता। शब्दों की चमक कई बार लोगों को आकर्षित कर लेती है, लेकिन किसी व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप उसके आचरण में दिखाई देता है। आज के समय में बोलने वालों की कमी नहीं है; विचारों, नारों और भाषणों की भीड़ में लोग अक्सर बिना सोचे-समझे प्रभावित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, विवेक और आत्मचिंतन पीछे छूट जाते हैं और व्यक्ति दूसरों के विचारों के अनुसार जीवन जीने लगता है।
यह कविता उसी प्रवृत्ति पर प्रश्न उठाती है। यह बताती है कि केवल सुन लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि विचार करना और आचरण को परखना भी आवश्यक है। शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण कर्म होते हैं, क्योंकि अंततः किसी भी विचार की सच्चाई उसके व्यवहार में ही दिखाई देती है।।
विचार और आचरण कविता
जिसकी हैसियत रावण के कुछ काज नहीं
उसे क्यों रावण कहलाने में कुछ लाज नहीं
वक्त बदलें है लेकिन मुर्खता नहीं
नाक कट गई है मगर उसे कभी लाज नहीं
मिलते हैं बतियाते हैं मगर वो दूर लगता है
छुपा के इरादे मिलते हैं जैसे कोई राज नहीं
हमने भी सीखें हैं दुनिया की चाल-चलन
वो आलतु फालतु है मेरे कोई सरताज नहीं
ठीक उसी तरह बातें करते हैं जैसे अच्छे लोग
गिरगिट है मगर कोई लाज नहीं
हम दुनिया से बुरे हैं लेकिन खुद से अच्छे
हमारे भीतर कोई राज़ नही !!!
on poetry status
रावण को आदर्श मानने वाले
तथाकथित बुद्धिजीवी कहलाने वाले
विचार के नाम पर नग्नता
सभ्य समाज को बहलाने वाले
गर्व है उसे मुर्खतापूर्ण सवाल उठाने पर
अभिव्यक्ति के नाम दंगा फैलाने वाले !!!!
अभी तक उसके विचारों पर विचार करता रहा,
सहसा याद आया—
उसने अपने आचरण को कितना भ्रष्ट किया था।
शब्दों में आदर्शों की बातें थीं,
चेहरे पर सच्चाई का आवरण था,
पर जब कर्मों को परखा मैंने,
वहाँ कुछ और ही कारण था।
अभिव्यक्ति के नाम पर कविता
बोलने वाले कितने बोलते हैं लोग,
सुनने वाले भी कितने सुनते हैं लोग।
विचार नहीं, विवेक नहीं,
बस जो सुन लिया, वही किया।
किसी ने कुछ कह दिया,
भीड़ ने उसे मान लिया,
अपने मन से सोचा नहीं,
सत्य को कभी जाना नहीं।
शब्दों की चमक क्षणिक होती है,
आचरण ही पहचान बनता है।
जो जीवन में उतर सके,
वही विचार महान बनता है !!!!
बोलने वाले कितना बोलते हैं,
बहरे होकर भी कितना सुनते हैं लोग।
विचार, सोच कुछ भी नहीं किया,
बोलने वाले ने बोल दिया,
और उसी के अनुसार जी लिया !!!
-राजकपूर राजपूत''राज''
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