poem on sorry
आज के समय में “सॉरी” शब्द इतना आम हो गया है कि इसके पीछे की संवेदनशीलता अक्सर खो जाती है। यह कविता उस स्थिति को दर्शाती है, जहाँ शब्द कहे जाते हैं, लेकिन उसका वास्तविक अर्थ और भावनाएँ कई बार अनसुनी रह जाती हैं।
सॉरी — आसान शब्द, गहरी संवेदनाएँ (कविता)
"सॉरी"
बहुत आसान शब्द है,
कहने और बोलने में।
लेकिन इसे अक्सर कहा जाता है
अपनी संवेदनशीलता को दबाने के लिए,
सामने वाले को अहसास दिलाने के लिए
कि वह सभ्य है,
और मामला निवृत्त हो जाता है
किसी की संवेदना से।
कहकर चला गया सॉरी,
ऐसी थी उसकी यारी।
चोट लगी हमें,
पर उसने आसानी से कह दिया सॉरी।
यह शब्द भी अनायास है,
रटंत का प्रयास है।
उसे लगता है हल्का,
कोई बुरा न मानें इसकी तैयारी,
इसलिए कह दिया सॉरी।
कविता का अर्थ
यह कविता दिखाती है कि कभी-कभी सरल शब्द “सॉरी” केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है। यह वास्तविक भावनाओं और संवेदनाओं की जगह नहीं ले पाता।
जीवन और संबंधों का संदेश व उद्देश्य
शब्दों का महत्व तभी है जब उनमें भावनाएँ हों।
संवेदनशीलता को दबाने की बजाय स्वीकार करना अधिक सार्थक होता है।
वास्तविक संबंध और समझ केवल औपचारिक शब्दों से नहीं, बल्कि ईमानदारी और अनुभव से बनते हैं।
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