तुम्हें पहले बताना था | प्रेम, विश्वास और रिश्तों पर भावपूर्ण हिंदी कविता
प्रेम है तो कोई बात राज नहीं रहता है । सब कुछ खुला हुआ रहता है । जो प्रेम में कहने के लिए डरते हैं । उसमें विश्वास की कमी है । जो पूरी तरह से प्रेम को स्वीकार नहीं किया है । प्रेम में कोई छुपाव- दुराव नहीं होता है । प्रेम में राज छुपाने से ज्यादा बुरा कुछ भी नहीं होता है । रिश्ते तब नहीं टूटते जब मतभेद होते हैं, बल्कि तब टूटते हैं जब संवाद समाप्त हो जाता है। प्रेम में शिकायत होना स्वाभाविक है, पर उसे मन में दबाए रखना दूरियाँ बढ़ा देता है। यह कविता उसी मौन, विश्वास और बिछड़ने की पीड़ा को व्यक्त करती है।
कविता हिन्दी में 👇👇
प्रेम पर हिंदी कविता
तुम्हें पहले बताना था
रूठ गया तो मनाना था
बात रखी रही लबों के दरमियान
इश्क में नहीं छुपाना था
मैं तो मर मिटा हूॅं तेरे चेहरे पे
यदि सोया था तो जगाना था
इश्क में भरोसा कमजोर न हो
प्यार किया है तो निभाना था
गैरों से जाहिर किया दर्द अपना
अपनो को क्या जलाना था
मैं भी तेरा अपना था
यूं दर्द अपना नहीं छुपाना था
उदासियों से रिश्ते नहीं चलते हैं
कभी हंसना था कभी रोना था
ज़माने की उदासीनता बहुत देखी,
मगर अपने रिश्ते बचाना था
जमाने की उदासीनता बताती हैं
इससे अच्छा मर जाना था !!!
और अंत में कविता
प्रेम की सबसे बड़ी ताकत विश्वास और संवाद है। जहाँ मन की बात कहने का साहस होता है, वहाँ गलतफहमियाँ टिक नहीं पातीं। रिश्ते निभाने के लिए केवल प्रेम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को सुनना और समझना भी आवश्यक है।
---राजकपूर राजपूत''राज''
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