प्रेम का सम्मान | विश्वास, आत्मीयता और सच्चे प्रेम पर हिंदी कविता poem of love
प्रेम केवल आकर्षण का नाम नहीं है। सच्चा प्रेम सामने वाले के सुख में अपनी खुशी खोजता है, उसकी मासूमियत की रक्षा करना चाहता है और बिना किसी स्वार्थ के उसके लिए शुभकामनाएँ करता है। वहीं प्रेम सम्मान भी चाहता है। वह किसी वस्तु की तरह उपयोग होकर भुला दिया जाना नहीं चाहता। यह कविता प्रेम की इन्हीं दो गहरी अवस्थाओं—करुणा और आत्मसम्मान—को व्यक्त करती है।
प्रेम कविता
प्रेम का सम्मान
क्या तुमने कभी सोचा है
कि मेरे दिल में
तुम्हारे लिए कितना दर्द है?
तुम्हारी मासूमियत देखकर
मेरा मन पिघल जाता है।
अनायास ही
मेरे होंठों पर
तुम्हारे लिए दुआ आ जाती है।
मैं यही चाहता हूँ
कि तुम सदा मुस्कुराते रहो,
तुम्हारी राहों में
खुशियों के फूल खिलें,
और जीवन
तुम्हारे लिए
आशा का उत्सव बना रहे।
यदि मेरे हिस्से में
कुछ भी न आए,
फिर भी
तुम्हारी खुशियाँ
कम न हों।
शायद
यही प्रेम है—
जहाँ अपने से पहले
दूसरे की खुशी की कामना की जाती है।
मैं तुम्हारी शंकाओं को भी
प्रेम का एक रूप मान लूँगा।
यदि तुम्हें डर है
कि प्रेम बँट जाएगा,
तो तुम्हारे इस डर को भी
समझने की कोशिश करूँगा।
लेकिन
मुझसे एक वादा करना—
मुझे अपने जीवन में
उस खूंटी पर मत टाँग देना,
जहाँ से
ज़रूरत पड़ने पर ही
निकाला जाता हो।
मैं कोई वस्तु नहीं,
एक जीवित एहसास हूँ।
मुझे
अपनी सुविधा का हिस्सा नहीं,
अपने विश्वास का हिस्सा बनाना।
प्रेम में
उपयोग नहीं,
उपस्थिति चाहिए।
याद तभी मत करना
जब अकेले हो जाओ;
याद इसीलिए करना
कि मैं
तुम्हारे जीवन का
एक अपना हूँ।
और अंत में कविता
प्रेम का अर्थ किसी पर अधिकार जमाना नहीं, बल्कि उसे सम्मान देना और उसके जीवन में अपनी सच्ची उपस्थिति बनाए रखना है। जो प्रेम केवल ज़रूरत के समय याद किया जाए, वह संबंध तो हो सकता है, लेकिन आत्मीयता नहीं। सच्चा प्रेम वही है जिसमें दुआ भी हो, विश्वास भी हो और एक-दूसरे को केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाए।
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