अधूरी यादों का सहारा | अकेलेपन और बिछड़े प्रेम पर भावुक हिंदी कविता akelepaan aur bichhda prem kavita
कुछ रिश्ते जीवन से चले जाते हैं, लेकिन स्मृतियों से नहीं जाते। समय आगे बढ़ता रहता है, पर मन कभी-कभी वहीं ठहर जाता है जहाँ प्रेम, अपनापन और उम्मीदें छूट गई थीं। यह कविता उसी मन की कहानी है, जो बिछड़ने के बाद भी यादों के सहारे जीता है और अकेलेपन में पुराने सपनों के धागे फिर से बुनने लगता है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇
अधूरी यादों का सहारा कविता
तुम चाहो या ना चाहो
मैं तुम्हें चाहता रहुॅंगा
तेरी यादों में जीऊंगा
तेरी यादों में मर जाऊंगा
तुम चले जाओ मगर
मैं तुम्हें सदा चाहूंगा !!!!
भावुक हिंदी कविता
जब भी खाली हुआ
तुम आए फिर से
एक अधूरा सा जीवन
अहसास हुआ फिर से
मेरा मन अकेलेपन में बुनने लगा
खामोश शामों में,
तन्हा रातों में,
मन फिर उन्हीं रास्तों पर चला,
जहाँ कभी तुम्हारे साथ
सपनों के दीप जलाए थे।
मेरा मन अकेलेपन में
कुछ बुनने लगा।
वही स्मृतियाँ,
जो लौटकर नहीं आएँगी,
उन्हीं को फिर से
संजोने लगा।
यही सोच-समझकर
दिल टूटने लगा।
कहीं उम्मीद भटक रही थी,
कहीं आशाएँ जग रही थीं।
बीते हुए पलों की
एक-एक कड़ी
फिर से जुड़ने लगी थी।
मेरा मन अकेलेपन में
फिर से बुनने लगा।
जो अब हमारा नहीं है,
जिसका कोई सहारा नहीं है,
उसी टूटे हुए ख़्वाब को
फिर से सजाने लगा।
जानता हूँ कि
समय पीछे नहीं लौटता,
बिछड़े हुए लोग
हर बार नहीं मिलते।
फिर भी मन है कि
कभी-कभी उम्मीद कर बैठता है,
और स्मृतियों के धागों से
एक नया संसार रचने लगता है।
मेरा मन अकेलेपन में
आज भी बुनता है,
यादों की चादर,
उम्मीदों के धागे,
और अधूरे प्रेम की
खामोश कहानी।
-राजकपूर राजपूत राज
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