तेरे ख़याल साथ चले हैं | प्रेम, स्मृति और अधूरे एहसास की कविता tere khayal saath chale hain

तेरे ख़याल साथ चले हैं | प्रेम, स्मृति और अधूरे एहसास की कविता tere khayal saath chale hain

कुछ रिश्ते जीवन में भले ही पूर्ण रूप से हमारे साथ न चल पाएं, लेकिन उनकी स्मृतियाँ हमारे भीतर स्थायी निवास बना लेती हैं। समय बीतता है, लोग समझाते हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं और जीवन नए अर्थ खोजने लगता है, फिर भी कुछ चेहरे, कुछ बातें और कुछ एहसास मन की गहराइयों में वैसे ही सुरक्षित रहते हैं।
यह कविता उसी भाव की अभिव्यक्ति है, जहाँ प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं रह जाता, बल्कि स्मृतियों, ख्यालों और आत्मीय अनुभूतियों का हिस्सा बन जाता है। दुनिया चाहे उसे भ्रम कहे या आधुनिकता के नाम पर भुला देने की सलाह दे, हृदय अपने सत्य को पहचानता है। प्रेम की यही विशेषता है कि वह दूरी और समय से परे जाकर भी मन के किसी कोने में जीवित रहता है और जीवन को एक अलग अर्थ प्रदान करता है।

तुम मेरे हो कविता 

खुद की गुफ़्तगू में
खुद ही अकेले हैं,
बेशक मेरे सफ़र में
तेरे ख़याल साथ चले हैं !!!

लोगों ने मुझे समझाया था,
प्यार-व्यार कुछ नहीं होता,
यह केवल मन का भ्रम है।
फिर भी तुम मेरे ख़यालों से नहीं हटे,
मेरे ख़्वाबों से नहीं बिछड़े।
मेरी स्मृतियों में आज भी
तुम्हारी तस्वीर वैसी ही है,
जैसे समय ने उसे छुआ ही न हो।
लोगों ने आधुनिकता के अर्थ बताए,
शायद तुम भी उन्हें समझती हो।
कहते हैं—
अपने लिए जीना ही जीवन है।
मगर मुझे हमेशा अधूरा लगा
वह पूरा जीवन,
जिसमें तुम्हारा साथ न हो।
दिल आज भी चुपके से कहता है—
"तुम मेरे हो।"
चाहे दूरी कितनी भी हो जाए,
चाहे समय कितनी ही करवटें बदल ले,
कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं,
एहसासों से जीवित रहते हैं।
और तुम उन्हीं एहसासों में
आज भी कहीं बसे हुए हो।
"तुम मेरे हो!"
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