जमाना बदला तो आदमी भी बदल गया
समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है—रिश्ते, सोच, और इंसान का व्यवहार भी। यह कविता उन बीते दिनों की याद दिलाती है, जब भावनाएँ सच्ची थीं और अपनापन हर रिश्ते में महसूस होता था । मगर आज इन सब रिश्तों में दिखाई नहीं देता है । जैसे हम उथले होकर जिंदगी जी रहे हैं ।
❤️ पुरानी बात हो गई (कविता)
पुरानी बात हुई
दिल के जज़्बात,
मोहब्बत की बात,
दिमाग के सामने
सारे सिद्धांत—
पुरानी बात हुई।
सूरज वही है,
चाँद वही है,
धरती, अम्बर वही हैं,
बदले केवल इंसान—
उसका ईमान,
उसकी पहचान।
जब उसने नज़रिए बदले,
जीने के तरीके बदले,
तो खुद्दारी भी बदल गई—
जो अब पुरानी बात हुई।
बरसों से मीठे बोल,
अपनापन जिसमें घोल,
लरजते थे होंठों से,
अहसास यूँ डोल—
पुरानी बात हो गई।
कोयल की बोली,
मस्ती से बहती पुरवाई,
पेड़ों की सरसराहट,
अपनेपन की आहट—
महसूस करते थे सभी,
पुरानी बात हो गई।
गोधूलि बेला में,
चरवाहे की राग में,
उमड़ते थे प्रेम
होली के फाग में—
पुरानी बात हो गई।
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🔍 कविता का भावार्थ
यह कविता हमें बताती है कि प्रकृति तो आज भी वैसी ही है, लेकिन इंसान की सोच और भावनाएँ बदल गई हैं। पहले जो अपनापन, सादगी और प्रेम था, वह अब धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है।
💔 बदलते समय का सच
आज के दौर में रिश्तों में पहले जैसा विश्वास और मिठास कम होती जा रही है। लोग बदल गए हैं—उनका नजरिया और जीने का तरीका भी।
🌿 संदेश
यह कविता हमें याद दिलाती है कि हमें अपनी जड़ों, अपने संस्कारों और सच्ची भावनाओं को नहीं भूलना चाहिए।

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