पानी की कीमत कविता हिन्दी Price of Water Poem

पानी की कीमत कविता हिन्दी 


पानी की कीमत प्यास है
बरसात में अहमियत भूल जाते हैं

इंसान का रिश्ता मतलब से है
मतलब निकल जाने से कीमत भूल जाते हैं

आदमी आखिर अपनी हैसियत दिखा देते हैं
जब मतलब निकल जाते हैं

लोग भूल जाते हैं वक्त के साथ साथ
धीरे धीरे ज़ख्म भर जाते हैं

उस खेत की हरियाली चली गई
जिस खेत के पानी सूख जाते हैं !!!

पानी ही नहीं 

तो जीवन ही नहीं 
सुविधाएं के पीछे भागने वाले 
अहमियत कहां जानने वाले 
आज तड़प है कल प्यास बुझेगी 
पानी की कीमत भुलेगी!!!!

जरुरत है इंसानों को
तब क़ीमत है
बरसात हुई तो
क़ीमत घट जाती है
पानी की !!!

पानी जब भी बरसे
कम बरसे
तो आदमी तरसें
अधिक बरसें तो
क़ीमत घटी !!!!

जरुरत की पूरी के बाद
क़ीमत नहीं रहती
भूख के बाद जैसे पहली रोटी की होती है
आखरी की नहीं होती !!!


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