मासूमियत बचाकर रखना | प्रेम और उम्मीद पर हिंदी कविता

मासूमियत बचाकर रखना | प्रेम और उम्मीद पर हिंदी कविता masoomiyat bachakar rakhna

जीवन की सबसे बड़ी पूँजी धन या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि मन की मासूमियत, प्रेम और विश्वास हैं। यह कविता इन्हीं मानवीय मूल्यों को सहेजने का संदेश देती है। इसमें बिछड़ने की पीड़ा भी है और पुनर्मिलन की आशा भी, जो इसे भावनात्मक गहराई प्रदान करती है।
समय बदलता रहता है, लोग भी बदल जाते हैं, लेकिन यदि मन की सरलता, प्रेम और उम्मीद जीवित रहें तो जीवन का सौंदर्य बना रहता है। यही कविता का संदेश है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अपने भीतर के प्रेम और मासूमियत को कभी समाप्त नहीं होने देना चाहिए।

मासूमियत बचाकर रखना


मासूमियत बचाकर रखना,
अपनी अहमियत बनाए रखना।

दो दिन की है ज़िंदगी अपनी,
दिलों में प्रेम सजाए रखना।

ज़िंदगी मेरी प्यासी है तेरे बिना,
मेरे वास्ते कुछ ख़्वाब सजाए रखना।

बहुत ज़ालिम है यह दुनिया,
अपना हर दर्द छिपाए रखना।

मैं खुश हूँ,मुझ पर तरस मत खाना,
बस उम्मीदों काएक दीया जलाए रखना।

मैं लौटूँगाकिसी दिन फिर,तब तक
अपने गाँव का अपनापन बचाए रखना।

सफ़र को लोग सुहाना कहते हैं,
तुम मंज़िल पर मेरे लिए
थोड़ी-सी जगह बचाए रखना।

दुनिया अक्सर चेहरे बदलती है,
तुम अपने भीतर का इंसान ज़िंदा बनाए रखना।

प्रेरणादायक कविता

मासूमियत बचाकर रखना,
दिलों में प्यार सजाकर रखना।

लौट आएँगे परिंदे शाम ढले,
अपना आशियाना सजाकर रखना।

लहरें चाहे मोड़ दें राहें सभी,
हाथों में पतवार संभालकर रखना।

मेरी कोशिशों पर हँसने वालों से,
कामयाबी का एक दिन इंतज़ार रखना।

वक़्त की गर्दिश लौट भी आती है,
जेब में कुछ पैसे बचाकर रखना। 

---राजकपूर राजपूत''राज''
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