अजीब दास्तां – हिंदी कविता ajeeb-daastan-hindi-kavita

अजीब दास्तां – हिंदी कविता ajeeb-daastan-hindi-kavita


प्रेम एक ऐसा दर्द है जो चुभन है, पीड़ा है लेकिन मीठा अहसास है । जिसे न छोड़ते बनता है कभी ।जब तक मिल न जाएं ।  एक पल दूरी सुहाते भी नहीं है । कभी -कभी लगता है कि ये दिल सब कुछ कह देगा लेकिन उसके सामने आने के बाद कुछ भी कह नहीं पाता है । अजीब हालत होते हैं दिल की। पढ़िए इस कविता हिन्दी 👇 

✨ कविता: अजीब दास्तां ✨

अजीब दास्तां है अपनी भी,
तू मेरा ख्याल है, ख़्वाब भी।
तेरी नज़रों ने लूट के ले गई
मेरा दिल भी और नसीब भी। 💖
हरदम बेचैनी रहती है दिल में,
तू मेरा सवाल भी, जवाब भी।
अजीब कश्मकश में हूँ तेरे बिना,
तू लगता है दूर भी, करीब भी।
तुम आ जाओ अब मेरी जिंदगी में,
मिल जाएगी जीने की तरकीब भी। 🌿
न कह सके, न रह सके,
अजीब दास्तां है अपनी भी।
तुम आए तो खुशी हुई मुझे,
लेकिन नजरें चुराईं अपनी भी।
तुम्हें देखते रहे, पहल होगी पहली,
दिल और जान अपनी भी।
अजीब दास्तां है अपनी भी,
मुझे आनंदित कर रहा था,
हरी-हरी दूबों पर पड़ी ओस की बूंदें,
और तुम्हारी याद भी। 🌸
मैं सहलाया उन दूबों को,
शरमाई और ठरक गई,
जैसे तुमको सुकून मिला और ठंडक भी।
अजीब दास्तां है अपनी भी,
न तुम वहां थे,
था बस प्रेम,
न कोई कमी थी,
बस हृदय में पूर्णता थी।
अजीब दास्तां है अपनी भी! 💖
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🌟 और अंत में कविता 🌟

यह कविता यह सिखाती है कि प्यार और ख्यालों की दुनिया कभी-कभी अजीब होती है।
दिल, यादें और ख्याल इतने जुड़े होते हैं कि एक-दूसरे में खो जाने और पा लेने का अनुभव ही जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।
सच्चा प्रेम वही है जो दिल में पूर्णता और सुकून दे, चाहे सामने हो या यादों में। 🌿✨



---राजकपूर राजपूत''राज''

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