तुम पढ़ लेना | अनकहे प्रेम और भावनाओं पर हिंदी कविता tum padh lena prem ki-kavita
कुछ प्रेम ऐसे होते हैं जिन्हें शब्द पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते। वे कविताओं, नज़रों और मौन में जीवित रहते हैं। प्रस्तुत कविता उसी भाव को व्यक्त करती है कि यदि कभी शब्द कम पड़ जाएँ, तो भावों को पढ़ना चाहिए, क्योंकि सच्चा प्रेम अक्सर कहा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।
तुम पढ़ लेना
मैं लिखूँगा कविताएँ,
तुम पढ़ लेना।
चाँद-सितारे,
फूलों की खुशबू,
हवाओं के संदेश—
सबमें
मेरा प्रेम पढ़ लेना।
जहाँ-जहाँ
मुझे तुम्हारा अहसास होगा,
वहाँ-वहाँ
हर शब्द में
तुम्हारा ही वास होगा।
अर्थ शायद
मैं तुम्हें
समझा न पाऊँ,
मगर
मेरे भाव
ज़रूर पढ़ लेना।
मैं जीता हूँ
तेरे ख़यालों में,
हर पल,
हर दिन,
हर रात।
हो सकता है
अचानक मुलाक़ात हो,
और मैं
अपने दिल की बात
कह न पाऊँ।
उस क्षण
जब मेरी नज़रें
तुम्हारी नज़रों से मिलें,
मेरी आँखों में ठहरी
वर्षों की प्रतीक्षा,
मेरे हृदय की तड़प,
और मेरे मौन का प्रेम—
तुम पढ़ लेना।
यदि कभी
मेरी कविताओं के पन्ने
तुम्हारे हाथों तक पहुँचें,
तो उन्हें
सिर्फ़ शब्द समझकर
मत पढ़ना।
उनके बीच छिपी
धड़कनों की आहट,
अनकहे सपनों की गर्माहट,
और एक सच्चे मन की
निष्कलुष चाह—
उसे महसूस करना।
क्योंकि
मेरी कविताएँ
स्याही से नहीं,
प्रेम से लिखी गई हैं
तुम पढ़ लेना !!!!
और अंत में मेरी कविता
सच्ची कविता का अर्थ शब्दों में नहीं, बल्कि उन भावनाओं में छिपा होता है जो उन्हें जन्म देती हैं। जब प्रेम ईमानदार होता है, तो एक नज़र, एक मौन और एक कविता भी पूरे हृदय की कहानी कह सकती है। इसलिए कभी-कभी शब्दों से अधिक, भावों को पढ़ना आवश्यक होता है।

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