धान की बालियां – हिंदी कविता Paddy Ears – Hindi Poem

🌸धान की बालियां – हिंदी कविता Paddy Ears – Hindi Poem 🌸

किसान और खेत का रिश्ता केवल रोज़गार नहीं, बल्कि संघर्ष, आशा और प्रेम का प्रतीक है। जिसके इर्द-गिर्द उसकी दुनिया घुमती है । जीवन की आशाएं, उम्मीदें सब कुछ उसकी खेती में हैं । किसान के पास वैसे दुःख ज्यादा है मगर इन्हें दुःखों के बीच में वह अपनी खुशियां ढूंढ लेती है । 

यह कविता धान के खेत, किसान की मेहनत और उनके सपनों की खूबसूरत झलक प्रस्तुत करती है।

✨ कविता: धान की बालियां ✨


धान की बालियों में जो रंगत है,
किसी किसान की ही संगत है। 🌾
जिसे पसीनों से सींचा होगा,
कुछ बदन भी चला होगा।
इसलिए,
दमक रही हैं सुनहरी बालियां! ✨
धान की बालियां को
किसान के पांव के छालों ने जब देखा,
दर्द महसूस नहीं हुआ,
साल का सफ़र अब आसान हुआ।

धुन की आदत में,
मेहनत की संगत में,
उसने ख्याब सजाया है।
अंकुरित बीजों को देखकर,
किसान खुशी-खुशी गाया है। 🎶
सहलाते हैं नन्हे पौधों को,
सजाते हैं अपने ख्वाबों को।
साल की उम्मीद हर्षाया है।
बादलों ने बरसाया है,
जिसकी दुनिया बसती है,
आंखें हंसती हैं,
वो अपनों का प्यार बने रहे संसार। 💛

जानते नहीं हैं छल-कपट को,
फ़ुरसत नहीं अपनाने को।
छोटी सी मांग उनकी,
उनका आसमां, जमीं उनकी! 🌿

सीमित संसार अपना,
सीमित विस्तार अपना।
नहीं चाहिए रंगीन जीवन,
बस खुश रहे परिवार अपना। 🌸
Paddy-Ears–Hindi-Poem


🌟 और अंत में कविता 🌟

यह कविता यह सिखाती है कि सच्ची खुशी और संतोष केवल बड़े भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि मेहनत, परिवार और प्राकृतिक जीवन में छिपा होता है।
किसान की मेहनत, उसके सपने और खेत की हर सुनहरी बालियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि सादगी और परिश्रम जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। 🌾💛
-राजकपूर राजपूत "राज "
 




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