आग और धुआँ: इश्क़ और जज़्बातों की गहराई गजल ishq-jazbaat-gazal

इश्क़ की दुनिया अक्सर हमें उलझनों और भावनाओं की आग में झोंक देती है। कभी हम अपने ख्यालों में बहते हैं, तो कभी दूसरों के असर से जलते हैं। इस गजल में उन छुपी हुई इच्छाओं और भावनाओं को सामने लाया गया है, जो हर दिल में कहीं न कहीं रहती हैं। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी में 👇

आग और धुआँ: इश्क़ और जज़्बातों की गहराई ishq-jazbaat-gazal

 
आग दबी हुई है धुऑ॑ कुछ और है
मनमाफ़िक बातें इरादें कुछ और है

मज़े से सुलग गए हैं आजकल सभी
सिकरेट का धुऑ॑ उड़ाना कुछ और है

वो शामिल हुई जिंदगी में इस तरह
हाथ छुड़ा के गए बहाने कुछ और है

ये उदासियाॅ॑ बताती है उसके चेहरे का
दिल में दबी चाहते बातें कुछ और है

लाख मुस्कुरा लो मुझे जलाने के वास्ते
इश्क बिना दिल का बहलाना कुछ और है !!!


आग दबी हुई है धुआं कुछ और है 
उसकी शिकायत, हुआ कुछ और है 

भगवान बदला तब वो जाना ईश्वर है 
मतलबी माइंड, चाहा कुछ और है 

बड़े इत्मीनान से बचाव करते हैं अपनों का 
आतंकवादी मासूम, एजेंडा कुछ और है  !!!!

और अंत में कविता हिन्दी 


इस गजल में इश्क़ और भावनाओं की जटिलताओं को उजागर किया गया है। यह बताती है कि अक्सर हमारी भीतर की आग और दिखावटी धुआँ अलग होते हैं, और रिश्तों में सच और दिखावा दो अलग राहें बनाते हैं।
छुपी इच्छाएँ, अनकहे जज़्बात और समाज के मतलबी व्यवहार के बीच, यह गजल हमें यह याद दिलाती है कि दिल की सच्चाई और अहसासों की पहचान हमेशा महत्वपूर्ण होती है।
 
ishq-jazbaat-gazal
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---- राजकपूर राजपूत'"राज'"








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