हर काल में लोग मतलबी थे ।Matlabi-log-or-rishtey-nate-kavita-hindi-sahitya-jivan बिना मतलब के यहां कोई संबंध नहीं बनाते हैं । लेकिन जहां पहले लोग मतलबी तो थे लेकिन इस बात का भी ध्यान रखते थे कि दूसरों का मतलब की प्राप्ति में स्वयं कोई बाधा नहीं बनें । एक नैतिकता थी । जिसका पालन सभी लोग करते थे । जबकि आज कल के लोग इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं । उसने नैतिक जिम्मेदारी को बेवजह समझते हैं । मतलब निकालो और चलते बनो ।तो पढ़िए इस पर एक कविता 👇👇

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मतलब में जीने वाले लोग

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 एक सिक्के के दो पहलू

और दोनों तरफ हैं हम

कभी इस पार ज्यादा

कभी उस पार कम


जब झूठ बोलकर फायदा हो

सच बोल के घाटा हो

बस इसी सौदेबाजी में

दोनों तरफ झुकते हैं हम

कभी इस पार ज्यादा

कभी उस पार कम


मौकापरस्ती का रंग चढ़ा है

अपना दोष दूसरों पर मढ़ा है

क्या अच्छा क्या बुरा है

बस सुविधा में जो मर्जी कह लूं


एक सिक्के के दो पहलू

और दोनों तरफ हैं हम

कभी इस पार ज्यादा

कभी उस पार कम 


प्यार नहीं है सीने में

फिर भी प्यार से बातें करें

न जाने कब जरूरत में

कोई यहां फायदा करें

जैसा रंग वैसा ढंग

इतनी समझदारी रख लूं


एक सिक्के के दो पहलू

और दोनों तरफ हैं हम

कभी इस पार ज्यादा

कभी उस पार कम


न सिद्धांत है न स्वाभिमान है

न उसके क्रिया कर्म में अभिमान है

 फायदे लेने के चक्कर में

न मान है न पहचान है

फिर भी जीने का अभियान है

मौकापरस्ती का हल तलाश लूं


एक सिक्के के दो पहलू

और दोनों तरफ हैं हम

कभी इस पार ज्यादा

कभी उस पार कम !!

रिश्ते

प्राथमिकताओं के आधार पर बंटा हुआ है

बस तुम्हें देखना है

किसी के रिश्तों में

अपनी प्राथमिकता !!! 

मतलबी लोग

प्यार के बोल

बातों से

सबको घोल

मतलब को फिर तोल

मतलब निकल जाने पर

रिश्तों से गोल !!!


 Matlabi-log-or-rishtey-nate-kavita-hindi-sahitya-jivan जमाना जितना खराब है । उतने ही हमें समझदार होना चाहिए । बौद्धिक, चरित्र, नैतिकता आदि जितने स्तर पर गिरा है । उस स्तर को तुरंत समझ जाना चाहिए ।

जहां समझ में देरी होती है,, वहां जमाना ख़राब है,, कहना पड़ता है । 

-राजकपूर राजपूत 

इन्हें भी पढ़ें 👉 सूरत और सीरत 

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