संघर्ष और आत्मसम्मान — हिंदी प्रेरणादायक कविता motivational hindi poem
यह कविता हमें बताती है कि सफलता के पीछे की मेहनत और संघर्ष को बहुत कम लोग समझते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि सच्चा आत्मसम्मान और अपने लिए जीने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
संघर्ष और आत्मसम्मान (कविता)
लोग सफलता देखते हैं,
उसके पीछे गिरा हुआ इंसान नहीं।
जैसे-तैसे जिनको जीना है, वे जीते हैं।
मतलब में हाथ मिलाए, वो खुद्दार नहीं।
मीठी-मीठी बातें सुनने को तैयार हैं,
कह दो सच तो कोई दोस्त यार नहीं।
झूठों को नीचा दिखाने में मज़ा आता है,
बार-बार सहने को हम तैयार नहीं।
इतना ही सच है इस दुनिया में,
कोई सच के लिए जीने को तैयार नहीं।
असफल हुआ तो क्या हुआ,
मैंने संघर्ष को छुआ।
बेहतर हूँ उनसे।
सफल लोगों के लिए ताली बजाते हैं,
मेरी राह अलग, मेरी सोच अलग।
मैं उनसे बेहतर हूँ,
जो सफल व्यक्तियों के लिए
कारपेट बिछाते हैं।
मैं मानता हूँ उसे,
जिसने कोशिश की,
दूसरों के लिए नहीं,
अपने लिए जिए।
मैं जानता था कि यह राह कठिन है,
मगर उससे ज्यादा लोगों की बातें सुनना कठिन है।
मैं अभी निराश नहीं हुआ था,
लोगों ने खिल्लियां उठानी शुरू कर दीं,
हिम्मत तोड़ना शुरू कर दीं।
मैं चल रहा था,
उन लोगों को सुनना और समझना छोड़ दिया।
कविता का भावार्थ
यह कविता जीवन में संघर्ष, आत्मसम्मान और लोगों की मानसिकता को उजागर करती है। यह बताती है कि केवल मेहनत और अपने लिए जीना ही स्थायी सफलता और आत्म-सम्मान दिला सकता है।
जीवन और संदेश
सफलता का मूल्य केवल प्रयास और संघर्ष से मिलता है।
दूसरों की आलोचनाओं और मानसिकताओं से प्रभावित न हों।
अपने लिए जीना और आत्मसम्मान बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
“संघर्ष और आत्मसम्मान” एक प्रेरक कविता है, जो हमें जीवन में सच्चाई, संघर्ष और आत्मसम्मान का महत्व समझाती है। यह हमें याद दिलाती है कि दूसरों की राय से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य और प्रयासों पर ध्यान देना चाहिए।
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-राजकपूर राजपूत राज

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