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कविता
जड़ खामोश रहे
जड़ खामोश रहे
राजकपूर राजपूत
अप्रैल 25, 2022
जड़ खामोश रहे
तब अच्छा है
अपनी ही गहराई में
धसी हुई
जरूरी पोषक लेती हुई
पेड़ की पत्तियों के लिए
उसके हरापन के लिए
पहुंचाता रहे
बड़ी ख़ामोशी से
अपना अस्तित्व मिटाकर !!!!
कविता
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