अब अंतर मुश्किल है | सच और झूठ पर विचारोत्तेजक हिंदी कविता Poem on Humans in-Hindi

अब अंतर मुश्किल है | सच और झूठ पर विचारोत्तेजक हिंदी कविता Poem on Humans in-Hindi

शब्द स्वयं न अच्छे होते हैं, न बुरे। उनका अर्थ बोलने वाले की नीयत और सुनने वाले की समझ से बनता है। आज के समय में शब्दों का उपयोग केवल विचार व्यक्त करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को प्रभावित करने, भ्रमित करने और अपने पक्ष में करने के लिए भी किया जाता है। प्रस्तुत कविता इसी विडंबना को सामने लाती है कि जब शब्दों का दुरुपयोग बढ़ता है, तब सच और झूठ के बीच का अंतर पहचानना कठिन हो जाता है।

अब अंतर मुश्किल है

अब अंतर मुश्किल है—
शब्दों में
सच और झूठ का।
वही शब्द
सच के लिए भी हैं,
और वही शब्द
झूठ के लिए भी।
अंतर केवल
उन्हें बोलने वाले की
नीयत में छिपा है।

अब अंतर मुश्किल है—

इंसानों में
अच्छे और बुरे का।
लोगों ने
शब्दों का उपयोग
अपने स्वार्थ के अनुसार
करना सीख लिया है।
वे अर्थ बदल देते हैं,
इरादे बदल देते हैं,
और शब्दों को
मनमाफ़िक रूप दे देते हैं।
इसी कारण
लोग थकने लगे हैं
एक-दूसरे को
समझने और पहचानने से।
कई बार
सच जानते हुए भी
अनजान बने रहते हैं।
जब सुविधा साथ होती है,
तब मौन रहते हैं;
और जब असुविधा सामने आती है,
तब सच के नाम पर
मुंह खोल देते हैं।
झूठ के पक्ष में भी
वे ऐसा समर्थन करते हैं,
मानो उनकी लड़ाई
किसी सत्य की रक्षा के लिए हो।
सच और झूठ का निर्णय
केवल शब्दों से नहीं,
बल्कि
आचरण, नीयत
और परिणाम से होता है।

और अंत में कविता 

सत्य की पहचान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, व्यवहार और कर्म से होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम किसी भी बात को केवल उसके प्रभावशाली शब्दों से नहीं, बल्कि उसकी नीयत, संदर्भ और परिणाम से भी परखें। विवेकपूर्ण दृष्टि ही हमें भ्रम से बचाकर सत्य के निकट ले जाती है।

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