मृत्यु और जीवन के अहसास — हिंदी कविता Life and Death hindi Poetry

मृत्यु और जीवन के अहसास — हिंदी कविता Life and Death hindi Poetry

यह कविता हमें जीवन और मृत्यु की वास्तविकताओं से रूबरू कराती है। यह दर्शाती है कि कैसे इंसान अपनी ही चाल और हालात में फंसकर अंततः अपने कर्मों और पछतावे से सामना करता है।

 मात खा गए आखिर (कविता)

मात खा गए आखिर,

अपनी ही चाल से।

जैसे फंस जाती है मकड़ी

अपने ही जाल में।

अब फुर्सत कहाँ है उसे

अपने ही हाल से।

वो मुस्कुरा कर धोखा देते हैं,

वाक़िफ हूं उसकी हर चाल से।

वादा किया है,

वे बदलेंगे आने वाले नए साल से।


मृत्यु को देख कर

हर कोई डर जाता है।

मरा हुआ आदमी,

अपने समय का खाटी व्यक्ति था,

किसी से नहीं डरता था।

लेकिन आज लाचार है,

शरीर पूरा लेकिन बेकार है।

विवश, पूरी तरह से असक्षम है।

शोक सभा में देखने वाले आ रहे हैं,

जा रहे हैं।

सबकी आंखें नम हैं,

मरे हुए आदमी से शिकायत कम है।

कुछ ने देख लिया है

अपनी भी मृत्यु,

कुछ खो चुके हैं अपनापन,

जिसका पछतावा

भर नहीं पाएंगे रिक्तता।

जबकि मरा हुआ आदमी

आश्वस्त लेटा है,

क्योंकि वह अब कुछ नहीं बोलता।

इसलिए अच्छा इंसान बन चुका है,

जिसका पछतावा सभी को है।

Life-and-Death-hindi-Poetry


 कविता का अर्थ 

यह कविता जीवन और मृत्यु की अनिश्चितता, इंसान के कर्मों और पछतावे की गहराई को दर्शाती है। यह हमें याद दिलाती है कि जीवन में अपने कर्म और व्यवहार की अहमियत समझना कितना जरूरी है।

 जीवन और सीख 

जीवन में निर्णय और कर्म महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पछतावा हमेशा रहता है।

मृत्यु के सामने सभी इंसान बराबर हैं; केवल अच्छे कर्म ही अमर रहते हैं।

इंसान को अपने हालात और व्यवहार के प्रति सजग रहना चाहिए।

निष्कर्ष


“मात खा गए आखिर” केवल एक कविता नहीं, बल्कि जीवन, मृत्यु और इंसान के पछतावे को समझने का माध्यम है। यह हमें याद दिलाती है कि जीवन में कर्म, अनुभव और सीख ही सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।


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