जवाब और यकीं – हिंदी कविता Ghazal on Social System

🌸 जवाब और यकीं – हिंदी कविता Ghazal on Social System 🌸


जीवन में अक्सर लोग हमें हमारी काबिलियत और मेहनत के बारे में आंकते हैं।
कई बार उनके दावे और टिप्पणियाँ हमें परेशान कर देती हैं।
लेकिन समय और कर्म हमेशा सच्चाई का जवाब देते हैं।
यह कविता यही संदेश देती है कि चुप रहना और अपने काम से जवाब देना ही सबसे बड़ा उत्तर है।

✨ कविता: जवाब और यकीं ✨


चुप रह कर उसे जवाब दिया,
उसके सवालों का जवाब दिया।
उसका दावा था कि मैं काबिल नहीं,
धीरे-धीरे मेरे कामों ने जवाब दिया।
बोल के कितना सिद्ध कर पाए तुम?
वक्त ने तेरे दावों का जवाब दिया।
उसे यकीं था कि चाहने वाले बहुत हैं, मगर
मुसीबत जब आई, यकीं ने जवाब दिया।
सियासत में न्याय की उम्मीद कहां है, राज़?
तेरे-मेरे के चक्कर में सच ने जवाब दिया! 🌿

चुप रह कर उसे जवाब दिया,
जिसने मेरे प्यार का हिसाब किया।
मुझे फुर्सत नहीं मिली उसे परखने की,
जिसने दिया नहीं कुछ, बस पाने का हिसाब किया।
वो अभी भी गौरवान्वित है अपने व्यवहार से,
अपनी गलती नहीं देखी, और दूसरों का हिसाब किया।
काबिल कहां है आजकल कोई?
उसे बोलने की आदत है जिससे हिसाब किया। 💔

🌟 और अंत में कविता 🌟

यह कविता यह संदेश देती है कि काम और समय ही सच्चाई और काबिलियत का असली प्रमाण हैं।
बोलने और दिखावे से कुछ नहीं होता; जो अपने काम और कर्म से न्याय करता है, वही सच्चा विजेता है।
समय के साथ, सभी दावे और भ्रांतियाँ खुद-ब-खुद सत्य के सामने झुकते हैं।
इसलिए जीवन में धैर्य, मेहनत और ईमानदारी बनाए रखना ही सबसे बड़ा उत्तर है। 💖
-राजकपूर राजपूत 
Ghazal on Social System


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