मोहब्बत, छल और ज़माने की सच्चाई -गजल Ghazal on social system

मोहब्बत, छल और ज़माने की सच्चाई -गजल Ghazal on social system

यह कविता हमें याद दिलाती है कि प्रेम केवल रिश्तों तक सीमित नहीं,

बल्कि इंसानियत, नैतिकता और साहस का भी प्रतीक है।

आज के समय में जहां हर कोई दिखावे और लाभ के पीछे भाग रहा है,

यह कविता हमें रोकती है और कहती है –

“सच्चाई और प्यार की राह कठिन है, लेकिन यही तुम्हें मजबूत बनाती है।

सफलता केवल तब मायने रखती है जब दिल साफ़ और सच में सच्चा हो।”पढिए इस पर कविता 👇 

ज़माने की सच्चाई कविता 

 कितनी आसानी से कह दिया

मैं तेरा अपना था सह लिया

मोहब्बत में चोट कितनी लगती है

तेरे सितम हॅंस कर सह लिया

अक्सर सुनने वाले को सुनाते हैं लोग

जाने कैसे बंदुकों के बीच चुप रह लिया!!!!


विचार, चलन की बिंदु से निकलता है 

जिसके इर्द-गिर्द जमाना नाचता है 

लोगों ने आस्था, संस्कार, चरित्र को 

सुविधा के आगे गौण माना 

सब समझ रहे थे 

सफलता मिलने के बाद 

जमाना नहीं पूछता 

आस्था, संस्कार, चरित्र को 


अगर मैं ऐसे कह दूं 

लोग मुझे गलत समझेंगे 

खुद पर झांको 

और देखो ज़माने को 

थक जाएंगे !!!!


तारीफ़ तो उनकी भी कर देते हैं 

जो बुरे हैं 

बम से उड़ानें वाले लोगों के चरित्र है 

मरना मारना 

शरीफ़ उस पर ध्यान नहीं देता है 

और अपने काम पर लग जाता है 

ठिठकते नहीं कहीं पर 

उसके पहनावे से उलट कोई देख ले 

आलोचना कर देंगे वहीं पर !!!!

-राजकपूर राजपूत " राज "

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Ghazal on social system




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