साहिलों पर कविता हिन्दी poem on love

साहिलों पर कविता हिन्दी poem on love

 शाम के साहिलों पर

सुनापन था

मेरा दर्द उभरा हुआ

लेकिन सुकून था

दौड़-धूप से थका हुआ

लेकिन तेरी यादों में सुकून था

तेरे ध्यान में खोया हुआ

कितना बेखबर, अनजान था

कल फिर होगी मेरी दौड़-धूप

तुझे पाने का ये अरमान था


शाम के साहिलों पर सुनापन था !!!!

साहिलों पर कविता हिन्दी 

मैंने विकास देखा है 

शाम को वापस आते गायें और बैलें 

अब गोधूली बेला नहीं बनाती हैं 

डामर की सड़कों पर चलते ही 

उसकी पहचान खो गई है 

मशीनों के आने से 

 अस्तित्व खो चुका है 

अपनी व्यस्तता में लोग 

रिश्ते खो चुका है 

उन चीजों से 

जिसकी अब उपयोगिता नहीं है !!!

poem on love



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