नाटक जारी है | जीवन, अहंकार और मानव व्यवहार पर हिंदी कविता

नाटक जारी है | जीवन, अहंकार और मानव व्यवहार पर हिंदी कविता natak jari hai hindi-kavita

जीवन एक रंगमंच की तरह है। हम जानते हैं कि एक दिन सब कुछ यहीं छोड़कर चले जाना है, फिर भी अहंकार, ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा और दिखावे के नाटक में उलझे रहते हैं। प्रेम की बातें बहुत होती हैं, लेकिन व्यवहार में संवेदनाएँ कम दिखाई देती हैं। यह कविता उसी विडंबना को उजागर करती है।

जीवन पर हिंदी कविता

नाटक जारी है
जानते हुए भी
आखिर इस दुनिया से
एक दिन जाना है
मौत सब पर भारी है
नाटक जारी है
ईर्ष्या-द्वेष में
 उलझे हुए
राग-द्वेष में
फंसे हुए
नफ़रत,प्रेम पे
भारी है
नाटक जारी है
बनकर भी सभ्य 
झुके हुए हैं 
चल कर भी रूके हुए हैं 
दिशाहीन सफ़र जारी है 
नाटक जारी है 

मिलता नहीं प्रेम कहीं 
मगर मिलते हैं साथ सभी 
दें कर चोट सॉरी कहने की तैयारी है 
नाटक जारी है 
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और अंत में कविता 

जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि सब कुछ यहीं रह जाना है। इसलिए ईर्ष्या, द्वेष और दिखावे में उलझने के बजाय प्रेम, विनम्रता और आत्मचिंतन को अपनाना अधिक सार्थक है। जो मनुष्य इस सत्य को समझ लेता है, उसके लिए जीवन नाटक नहीं, बल्कि एक सार्थक यात्रा बन जाता है।

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