I am afraid of secularism. poetry hindi
सेकुलरिज्म से डर लगता है
ये दोगलों का घर लगता है
सीधे बैलों को डंडा पड़े
बदमाशों से डर लगता है
सच को सच कहने की हिम्मत चाहिए
तथाकथित शिक्षित लोगों से डर लगता है
उनके ज्ञान की सीमा नहीं
मगर खुद के गिरेबान से डर लगता है
सवाल - जवाब के लिए नरम दिल
कट्टरता से जिसे डर लगता है
प्रेम करने से हमें कोई परहेज नहीं
चालक लोगों से डर लगता है
वो अभी भी धर्मं पर सवाल करते है
मगर आतंकवादियों के धर्म से डर लगता है !!!
सेकुलरिज्म से डर लगता है
जब तुम बताते हो
अच्छी बातें
जीने की आदतें
जिसका अनुसरण बहुत मुश्किल है
तेरे लिए
जिसे तुम देना चाहते हो
दूसरों को
और समझदार बन जाते हो
समाज में !!!
कितना रूढ़िवादी हो
यह कहकर
भाईचारा है
जबकि भाई तुम हो
हम चारा हैं !!!
दुनिया असमंजस में है
क्या बताएं क्या सिखाएं
अच्छी बातों की आड़ में
मतलब निकालने सब आए
जबकि बुरी बातों की जानकारी से
खुद को बचाएं !!!
रूढ़िवादी हो गया है
सभी विचार
जिसमें सच्चाई है
लोग पैसा और एजेंडाधारियों से
डरते हैं
आदर्शवादियों से नहीं !!!
सेक्युलर गिरोह से डर लगता है
समझाते उसे है
जो समझते हैं
गला काटने की आदत यदि होती
हमें नहीं समझाते
बहुत घबराते
हमारे घर आते
मनाकर जाते
समझाकर नहीं !!!!!
नफरत वो नहीं फैलाते हैं
जो किसी के अस्तित्व को स्वीकारते हैं
नफ़रत वो फैलाते हैं
जो स्वीकारते नहीं किसी को
मानते नहीं है किसी को
खुद के समकक्ष
ऊंची नीची सोच में उलझकर
खुद को बड़ा साबित करना है जिसे
सियासत चुपके से आती है
कहीं से भी
कहीं पर भी
बिना दस्तक देकर
रिश्तों में
किसी भी रूप में
छांव में
धूप में
शामिल हो जाती है
और खोदने लगती हैं
जड़ें
भीतर ही भीतर
पौधों के संग रहकर
जो जानता है
पौधे का विकास
कैसे रोका जाना है
पौधे के साथ रहकर
अपना बनाकर
इंतजार करना है
उसके कमजोर होने तक !!!
सियासत में बताई नहीं जाती
मन की बातें
छुपाई जाती है
नीयत
जो जितने ज्यादा चालाक होते हैं
गला रेत कर भी शरीफ़ होते हैं!!!
इन्हें भी पढ़ें 👉 राजनीति क्या है
0 टिप्पणियाँ