मेरी कविताएँ | प्रेम, विश्वास और भावनाओं पर हिंदी कविता meri kavitayein prem aur bharosa
कविता केवल कल्पना का संसार नहीं होती; वह कवि के अनुभवों, संवेदनाओं और जीवन-दर्शन का जीवंत रूप होती है। जब प्रेम हृदय में गहराई से बस जाता है, तो वह शब्दों के माध्यम से कविता बनकर बहने लगता है। प्रस्तुत कविता उसी सच्चे प्रेम, आत्मिक अभिव्यक्ति और विश्वास की यात्रा है।
मेरी कविताएँ
मेरी कविताओं के
हर शब्द में
सिर्फ़ तेरी प्यास है,
एक अटूट आस है।
ठहरो कुछ पल
मेरे पास,
ताकि तुम्हें
अपनी आँखों में भर लूँ,
और शब्दों में
तुम्हारी छवि उकेर लूँ।
शायद
यही मेरी प्यास का
एक छोटा-सा उत्तर हो।!!!
मेरी कविता
कोरी कल्पना नहीं है,
जिस पर मैं
क्षण भर ठहर जाऊँ।
मेरी कविता
किसी की वाहवाही के लिए नहीं,
न ही तालियों की गूँज के लिए है।
मैं उसे इसलिए नहीं लिखता
कि लोग सराहें,
बल्कि इसलिए लिखता हूँ
कि मेरा हृदय
अपने सत्य को व्यक्त कर सके।
मेरी कविताएँ
मेरे हृदय की भावनाएँ हैं,
मेरे जीवन का अनुभव हैं,
मेरे प्रेम की धड़कन हैं।
मैं
जैसा महसूस करता हूँ,
वैसा ही लिखता हूँ।
कोई समझे
या न समझे,
फिर भी
मैं उन्हें
धीरे-धीरे गुनगुनाता हूँ।
क्योंकि
वही मेरी सच्ची कविता है!!!!
मैं जानता हूँ,
शायद तुम
मेरे अहसासों से
पूर्णतः नहीं जुड़ पाओगे।
मैं प्रेम में जीता हूँ,
और प्रेम ही
मेरे जीवन की प्राथमिकता है।
मैंने हमेशा
अपने अस्तित्व को
दूसरों के सुख-दुःख से जोड़कर देखा है।
पेड़ों की छाँव,
पत्तों की सरसराहट,
और प्रकृति की नीरवता में भी
मुझे प्रेम का स्पर्श मिलता है।
प्रेम जब
निश्चित और सच्चा होता है,
तब वह
स्वतंत्र भी होता है।
वहाँ
दिखावे की ज़रूरत नहीं होती,
न किसी भय की,
न किसी छल की।
प्रेम में
न दुराव होता है,
न छिपाव।
वहाँ
उम्मीद से बढ़कर
भरोसा होता है,
और शब्दों से बढ़कर
मौन बोलता है।
और अंत में कविता
सच्ची कविता प्रशंसा पाने के लिए नहीं, बल्कि मन के सत्य को व्यक्त करने के लिए लिखी जाती है। उसी प्रकार सच्चा प्रेम अपेक्षाओं से नहीं, बल्कि विश्वास, अपनापन और पारदर्शिता से जीवित रहता है। जब प्रेम में दुराव नहीं रहता, तब कविता भी केवल शब्द नहीं रहती, बल्कि जीवन का अनुभव बन जाती है।
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