Mere Geet – Shayari, Kahani aur Lyrics
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गजल
चांद लगता है जैसे
चांद लगता है जैसे
अक्टूबर 05, 2020
ऐ ! चाॅ॑द लगता है जैसे
तू खुद में तन्हा है जैसे
शबनम पड़ी हैं जमीं पर
बहुत रोया है जैसे
नमी है उसकी ऑ॑खों में
कई दर्द छुपाया है जैसे
कह ना सके दिल की बात
सागर का पानी गहरा है जैसे
---राजकपूर राजपूत''राज''
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2 टिप्पणियाँ
Sonu sahu
5 अक्टूबर 2020 को 7:15 am बजे
वाह वाह अति सुन्दर रचना
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हीरा सिंह
6 अक्टूबर 2020 को 7:52 pm बजे
सुन्दर
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2 टिप्पणियाँ
वाह वाह अति सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंसुन्दर
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