दिनभर का थका हुआ आदमी हूॅ॑ आराम हो जाय
दिल चाहता है तेरी बाहों के दरिम्यान शाम हो जाय
वक्त ऐसे गुजरा समेटने में जिंदगी को खबर ना हुई
दिल चाहता है आखिरी सफर भी तेरे नाम हो जाय
---राजकपूर राजपूत''राज''